जेल से बाहर आएगा दाऊद का भाई, जबरन वसूली मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने इकबाल कासकर को दी जमानत

दाऊद इब्राहिम के भाई को हाईकोर्ट ने राहत दी है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने वित्तीय अनियमितताओं के एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के भाई इकबाल कासकर को जमानत दे दी है।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने वित्तीय अनियमितताओं के एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के भाई इकबाल कासकर को जमानत दे दी है।
इकबाल कासकर (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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मुंबई: वित्तीय अनियमितताओं के एक मामले में अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के भाई इकबाल कासकर को जेल गया था। अब कासलकर के जेल से बाहर आने की खबर सामने आई है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने वित्तीय अनियमितताओं के एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के भाई इकबाल कासकर को जमानत दे दी है। यह मामला 2017 में जबरन वसूली की शिकायत पर दर्ज हुआ था।

इकबाल कासकर के खिलाफ अंतिम मामला लंबित था। अब चूंकि अदालत ने इकबाल कासकर को जमानत दे दी है, इसलिए इकबाल की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। इकबाल कासकर को 26 अप्रैल को वसूली के मामले में महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (विशेष मकोका) के तहत एक अदालत ने बरी कर दिया था। कासकर के वकील एडव्होकेट ताबिश मुमान ने दावा किया कि अब तक ईडी द्वारा अदालत में किसी गवाह से पूछताछ नहीं की गई है।

बिना सुनवाई के जेल मे डालना अधिकारों का उल्लंघन

उन्होंने यह भी दावा किया कि चूंकि कथित वित्तीय अनियमितताओं की राशि एक करोड़ रुपए से कम थी, इसलिए यह अपराध पीएमएलए की धारा 45 के तहत जमानत योग्य था। हालांकि, विशेष पीएमएलए अदालत ने 26 जून 2024 को इस याचिका को खारिज कर दिया था। उस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई। इकबाल कासकर पहले ही एक ऐसे अपराध के लिए तीन साल हिरासत में बिता चुका है, जिसके लिए तीन साल की सजा का प्रावधान है। बिना किसी सुनवाई के कासकर को लगातार जेल में रखना उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। महाराष्ट्र से जुड़ी अन्य खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 

अपराध साबित करने में विफल

ईडी ने यह भी आरोप लगाया है कि ईडी इकबाल कासकर को जबरन वसूली गई नकदी, फ्लैट या कथित साजिश से जोड़ने वाला कोई सबूत पेश करने में विफल रही। विशेष अदालत ने कासकर को जमानत दे दी, क्योंकि जांच एजेंसी उसके खिलाफ आरोप साबित करने में विफल रही। न्यायमूर्ति मिलिंद जाधव की एकल बेंच ने इसे रेखांकित किया। अदालत ने कासकर को जमानत देते हुए यह भी स्पष्ट किया कि जब अभियोजन पक्ष मूल अपराध में आरोपी के अपराध को साबित करने में विफल रहता है तो आरोपी को पीएमएलए अपराध में जमानत दी जानी चाहिए।

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