क्या Cluster Developement Scheme से संवरेगा मुंबई का भविष्य? श्रीकांत शिंदे ने बताई योजना की खूबियां

Shrikant Shinde Statement: मुंबई में Cluster Developement Scheme पर सांसद श्रीकांत शिंदे ने दिया बड़ा बयान। योजना को आधुनिक शहरी विकास का एक अनोखा और समावेशी समाधान बताया। जानें आगे क्या कहा?
Will the Cluster Development Scheme Shape Mumbai's Future? Shrikant Shinde Highlights the Scheme's Merits
डॉ श्रीकांत शिंदे (सोर्स: फाइल फोटो)
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Cluster Developement Scheme News: शिवसेना सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे ने क्लस्टर डेवलपमेंट योजना को आधुनिक शहरी विकास का एक अनोखा और समावेशी समाधान बताया है। उनके अनुसार, मुंबई जैसे महानगरों में बढ़ती भीड़ और घटती खुली जगहों के बीच यह योजना एक व्यवस्थित शहरी कायापलट का जरिया है।

सांसद श्रीकांत शिंदे का बयान

डॉ श्रीकांत शिंदे बताया कि बढ़ते शहरीकरण के कारण अस्पतालों, खेल के मैदानों और बेहतर आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं को उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती बन गया है। क्लस्टर डेवलपमेंट इसे सुनियोजित तरीके से हल करता है। शिंदे का तर्क है कि यह योजना केवल निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गरीबों को भी वही आधुनिक सुविधाएं और जीवन स्तर प्रदान करने का लक्ष्य रखती है जो अब तक केवल संपन्न वर्ग के पास था। ठाणे से शुरू हुई यह योजना अब मुंबई के 19 क्लस्टर, कल्याण, डोंबिवली, अंबरनाथ और उल्हासनगर तक फैल चुकी है।

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का विजन

सांसद डॉ श्रीकांत शिंदे ने इस क्लस्टर डेवलपमेंट योजना का श्रेय उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के विजन को दिया है, जिन्होंने पद संभालने से पहले ही अर्थात जब वे केवल विधायक थे तब इसके लिए पैरवी की थी और बाद में इसे एक नीतिगत ढांचे में ढाला।

आलोचकों और स्थानीय निवासियों के लिए मुख्य सवाल यह है कि क्या यह समावेशी विकास उन गरीब निवासियों तक भी पहुंचेगा जो रेलवे की जमीन पर रह रहे थे, या यह विकास केवल वैध आवासीय क्षेत्रों तक ही सीमित रहेगा? सबसे बडा सवाल यह उठता है कि क्या मुंबई केवल अमीरों का शहर बनकर रह जाएगा या इन सब योजनाओं का फायदा मुबई के हर कोने तक पहुंचेगा।

सांसद डॉ श्रीकांत शिंदे का यह बयान संकेत देता है कि महाराष्ट्र सरकार मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में क्लस्टर डेवलपमेंट को अपना सबसे महत्वाकांक्षी शहरी सुधार मॉडल मानती है। हालांकि, जमीन पर कार्यान्वयन के दौरान होने वाला विस्थापन और बुनियादी ढांचे के विस्तार के बीच का तालमेल ही यह तय करेगा कि यह मॉडल वास्तव में कितना समावेशी साबित होता है।उन्होंने इसका श्रेय उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के विजन को दिया है, जिन्होंने पद संभालने से पहले ही इसके लिए पैरवी की थी और बाद में इसे एक नीतिगत ढांचे में ढाला।

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