छत्रपति शिवाजी महाराज के जलदुर्गों का खुलेगा रहस्य! सिंधुदुर्ग समेत 4 किलों पर होगा रिसर्च, सरकार ने किया ऐलान

Chhatrapati Shivaji Maharaj Fort: शिवाजी महाराज की विरासत को सहेजने के लिए सरकार ने 4 किलों पर शोध हेतु मुंबई विश्वविद्यालय के तहत 50 लाख की निधि और स्वतंत्र केंद्र को मंजूरी दी।
Chhatrapati Shivaji Maharaj Fort Research 50 lakh approved for 4 forts including Sindhudurg
पद्मदुर्ग किला (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Chhatrapati Shivaji Maharaj Fort Research: छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर सरकार ने चार किलों सिंधुदुर्ग, पद्मदुर्ग, राजकोट और सर्जेकोट के गहन अध्ययन के लिए मुंबई विश्वविद्यालय के अधीन एक स्वतंत्र अनुसंधान केंद्र स्थापित करने के लिए 50 लाख रुपए की निधि स्वीकृत की है। संस्कृति विभाग के मंत्री आशीष शेलार की तरफ से दिए गए प्रस्ताव को अब सरकार की मंजूरी मिल गई है, और यह निर्णय सिंधुदुर्ग सहित इन किलों के अध्ययन, अनुसंधान और प्रलेखन को एक नई दिशा देगा। यह अनुसंधान केंद्र मालवण में स्थापित किया जाएगा।

इस निधि से स्थापित यह शोध केंद्र सिंधुदुर्ग, पद्मदुर्ग, राजकोट और सर्जेकोट के चारों किलों की विरासत का वैज्ञानिक पंजीकरण, ऐतिहासिक दस्तावेजों का संग्रह, शोध प्रबंध प्रकाशन, व्याख्यान श्रृंखला, युवा शोधकर्ताओं का मार्गदर्शन और बहुआयामी गतिविधियों के लिए कार्य करेगा। मंत्री शेलार ने विश्वास व्यक्त किया है कि यह शोध केंद्र छत्रपति शिवाजी महाराज की शक्ति और दूरदृष्टि के व्यापक प्रसार में योगदान देगा, क्योंकि यह क्षेत्र छत्रपति शिवाजी महाराज के युग में व्यापार का एक महत्वपूर्ण केंद्र था।

12 अप्रैल, 2025 को सिंधुदुर्ग किले के पूरे हुए 358 वर्ष

सिंधुदुर्ग किले ने 12 अप्रैल, 2025 को 358 वर्ष पूरे किए। किले में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में मंत्री आशीष शेलार ने इस अध्यासन की घोषणा की। पालक मंत्री नितेश राणे, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष अतुल कालसेकर, भाजपा प्रदेश सचिव प्रमोद जठार और भाजपा सिंधुदुर्ग जिला अध्यक्ष प्रोफेसर प्रभाकर सावंत ने मालवण से इस विषय के विशेषज्ञों को बुलाकर सरकार को एक विस्तृत प्रस्ताव भेजा था, अध्ययन के बाद सरकार ने इस अध्यासन का डिजाइन तैयार किया है।

व्यापार के केंद्र रहे किले

सिंधुदुर्ग किला, पद्मदुर्ग किला, राजकोट किला और सर्जेकोट किला के बारे में अभी भी बहुत सारी जानकारी जनता तक पहुंचानी बाकी है और इन किलों का अध्ययन करना अभी भी जरूरी है। इस विषय से संबंधित सभी दस्तावेजों को एकत्र करके उनका अध्ययन करना होगा, यहां व्यापार का केंद्र हुआ करता था, इसके ऐतिहासिक दस्तावेज मौजूद है। इसलिए, संस्कृति विभाग को मुंबई विश्वविद्यालय में सिंधुदुर्ग किला, पद्मदुर्ग किला, राजकोट किला और सर्जेकोट किलों के अध्ययन के लिए एक अध्ययन केंद्र की आवश्यकता थी और इसके लिए 50 लाख रुपए का कोष उपलब्ध कराया गया है।

अधिक से अधिक युवाओं को छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन से प्रेरणा लेकर देश का निर्माण करना चाहिए, राज्य की स्थापना करनी चाहिए और इसका अध्ययन करना चाहिए, मंत्री शेलार ने कहा कि हम इस अध्ययन के लिए बिना किसी खर्च के यह प्राथमिक सुविधा प्रदान कर रहे हैं।

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