बॉम्बे हाईकोर्ट में CBI का बयान, तीसरे पक्ष की याचिका पर RIL के खिलाफ FIR नहीं

Bombay High Court में सीबीआई ने स्पष्ट किया कि ओएनजीसी या केंद्र सरकार की मांग पर ही रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के खिलाफ जांच संभव है। तीसरे पक्ष की याचिका पर सीधे एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती।
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बॉम्बे हाईकोर्ट (सौ. सोशल मीडिया )
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CBI affidavit Bombay High Court: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बॉम्बे हाईकोर्ट में स्पष्ट किया है कि यदि ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) या केंद्र सरकार औपचारिक रूप से अनुरोध करती है, तो एजेंसी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के खिलाफ जांच शुरू कर सकती है। हालांकि, किसी तीसरे पक्ष की याचिका के आधार पर सीधे एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती।

यह हलफनामा सीबीआई की ओर से अधिवक्ता कुलदीप पाटिल ने मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम ए. अंखड़ की खंडपीठ के समक्ष दाखिल किया। अदालत दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव के निवासी सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र मारू की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

याचिकाकर्ता के आरोप

जितेंद्र मारू ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि कथित गैस माइग्रेशन मामले में आरआईएल की गतिविधियों से सरकारी खजाने को नुकसान हुआ है। उन्होंने मांग की है कि इस मामले में कंपनी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराई जाए।

तीसरे पक्ष की याचिका पर सीमा

सीबीआई ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता इस मामले में ‘तीसरा पक्ष’ है। एजेंसी के अनुसार, जांच शुरू करने के लिए संबंधित सरकारी संस्था या केंद्र सरकार का औपचारिक अनुरोध आवश्यक होता है। इसलिए सीधे अदालत के निर्देश पर तीसरे पक्ष की याचिका के आधार पर एफआईआर दर्ज करना संभव नहीं है।

आगे की सुनवाई पर नजर

हाईकोर्ट में इस मामले की आगे भी सुनवाई जारी रहेगी। अदालत यह तय करेगी कि उपलब्ध तथ्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर आगे की प्रक्रिया क्या होगी। फिलहाल, सीबीआई के रुख से यह स्पष्ट हो गया है कि जांच की पहल संबंधित सरकारी निकायों की ओर से ही होनी चाहिए।

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