

Operation Tiger Controversy BJP MLA Slams Eknath Shinde: महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के 6 लोकसभा सांसदों के पाला बदलने की खबरों के बीच शुरू हुआ 'ऑपरेशन टाइगर' अब सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के भीतर ही कलह का कारण बनता दिख रहा है। नागपुर की सावनेर विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कद्दावर विधायक डॉ. आशीष देशमुख ने सोमवार (23 जून 2026) को एक ऐसा बयान दिया है, जिसने एकनाथ शिंदे और महायुति के रणनीतिकारों को असहज कर दिया है। आशीष देशमुख ने विपक्षी सांसदों को पाले में लाने का तो स्वागत किया है, लेकिन राज्य स्तर पर विपक्षी विधायकों को गठबंधन में शामिल करने की नीति पर सीधे और तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं।
देशमुख का यह बयान ऐसे समय आया है जब शिवसेना (UBT) के दो प्रमुख विधायकों ने भी उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर आधिकारिक रूप से शिंदे गुट वाली शिवसेना में शामिल होने के संकेत दिए हैं। बीजेपी विधायक के सवाल से शिंदे खेमे में हड़कंप मचा हुआ है।
बीजेपी विधायक आशीष देशमुख ने मीडिया से खुलकर बात करते हुए शीर्ष नेतृत्व की इस रणनीति पर अपनी असहमति जताई। उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूत बनाने तथा संसद में कई अत्यंत महत्वपूर्ण जनहित विधेयकों को बिना किसी बाधा के पारित कराने के लिए विपक्षी सांसदों का राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में स्वागत करना एक सही और व्यावहारिक कदम है। मैं उनके इस फैसले का दिल से स्वागत करता हूं। लेकिन मेरा सीधा सवाल यह है कि क्या हमें महाराष्ट्र की प्रांतीय राजनीति में भी विपक्षी विधायकों को तोड़ने की वाकई कोई आवश्यकता है?"
आशीष देशमुख ने सूबे के विधायी आंकड़ों का हवाला देते हुए गठबंधन के मूल कार्यकर्ताओं और नेताओं की चिंता को सामने रखा। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, "महाराष्ट्र विधानसभा में कुल 288 सीटें हैं और वर्तमान में हमारे सत्तारूढ़ गठबंधन (महायुति) के पास पहले से ही 237 विधायकों का प्रचंड और दो-तिहाई से अधिक का बहुमत है। इस विशाल कुनबे में भाजपा, शिवसेना (शिंदे गुट) और सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के निष्ठावान सदस्य शामिल हैं। यदि हम बाहर से और अधिक विपक्षी विधायकों को अपनी पार्टी या गठबंधन में ठूंसते रहेंगे, तो इससे पहले से जमीन पर काम कर रहे महायुति के मौजूदा विधायकों और समर्पित कार्यकर्ताओं की स्थिति कमजोर होगी, जो कि उनके साथ सरासर अन्याय होगा।"
दरअसल, यह पूरा अंदरूनी विवाद तब सतह पर आया जब हाल ही में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सार्वजनिक रूप से संकेत दिए थे कि आगामी दिनों में महा विकास अघाड़ी (MVA) के कई और बड़े चेहरे तथा विधायक पाला बदलकर उनके साथ आ सकते हैं। शिंदे गुट की इस 'विस्तारवादी' नीति से भाजपा के उन स्थानीय नेताओं और विधायकों में असुरक्षा की भावना पैदा होने लगी है, जिन्हें डर है कि बाहर से आने वाले नेताओं के कारण आगामी चुनावों में उनके टिकट कट सकते हैं या उनके निर्वाचन क्षेत्रों में नए प्रतिद्वंद्वी खड़े हो जाएंगे। आशीष देशमुख के इस बेबाक बयान ने महायुति के भीतर सीटों के तालमेल और अंदरूनी असंतोष को एक बार फिर से हवा दे दी है।