IAS तुकाराम मुंढे का 21 साल में 24वां तबादला; अब संभालेंगे महाराष्ट्र आपदा प्रबंधन विभाग की कमान

IAS Tukaram Mundhe Transfer: तुकाराम मुंढे का 24वां तबादला, आपदा प्रबंधन सचिव नियुक्त। अश्विनी भिडे BMC की पहली महिला आयुक्त बनीं। महाराष्ट्र ब्यूरोक्रेसी में बड़ा फेरबदल।
IAS Tukaram Mundhe Transfer
IAS Tukaram Mundhe Transfer (फोटो क्रेडिट-X)
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Tukaram Mundhe Success Story: महाराष्ट्र की नौकरशाही में अपनी ईमानदारी और सख्त कार्यशैली के लिए मशहूर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी तुकाराम मुंढे एक बार फिर चर्चा में हैं। मंगलवार, 31 मार्च 2026 को महाराष्ट्र सरकार द्वारा किए गए बड़े प्रशासनिक फेरबदल में मुंढे का तबादला कर दिया गया है। 21 साल के करियर में यह उनका 24वां तबादला है, जिसने एक बार फिर सिस्टम और ईमानदार अधिकारियों के बीच के संघर्ष की बहस को छेड़ दिया है। मुंढे के साथ अश्विनी भिडे और लोकेश चंद्र जैसे कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के भी विभाग बदले गए हैं, लेकिन मुंढे का बार-बार होने वाला ट्रांसफर हमेशा की तरह सुर्खियों का केंद्र बना हुआ है।

दिव्यांग कल्याण विभाग में सचिव के रूप में कार्यरत तुकाराम मुंढे को अब राज्य सचिवालय में सचिव (आपदा प्रबंधन, पुनर्वास, राजस्व और वन विभाग) के महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया गया है। सरकार ने उन्हें एक ऐसी जिम्मेदारी सौंपी है जहाँ त्वरित निर्णय और जमीनी पकड़ की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है।

बीड़ के किसान पुत्र से 'सिंघम' IAS बनने तक का सफर

तुकाराम मुंढे मूल रूप से महाराष्ट्र के बीड़ जिले के एक छोटे से गांव के रहने वाले हैं। एक साधारण किसान परिवार में जन्मे मुंढे ने अपनी शुरुआती शिक्षा जिला परिषद के सरकारी स्कूल से प्राप्त की। ओबीसी के वंजारी समाज से आने वाले मुंढे ने विपरीत परिस्थितियों में औरंगाबाद से अपनी कॉलेज की पढ़ाई पूरी की और साल 2005 में यूपीएससी (UPSC) की परीक्षा पास कर आईएएस अधिकारी बने। सोलापुर में सब-कलेक्टर के रूप में अपनी पहली पोस्टिंग से ही उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई, जिसके कारण उन्हें जनता के बीच 'सिंघम' जैसी पहचान मिली।

विवादों और उपलब्धियों से भरा 21 साल का करियर

अपने दो दशक से अधिक के करियर में तुकाराम मुंढे ने नवी मुंबई नगर निगम के आयुक्त, पुणे महानगर परिवहन महामंडल लिमिटेड (PMPML) के प्रमुख और नासिक नगर निगम आयुक्त जैसे कई अहम पदों पर कार्य किया है। जहाँ भी उनकी नियुक्ति हुई, उन्होंने अवैध निर्माण, भू-माफिया और सिस्टम की खामियों पर कड़ा प्रहार किया। नवी मुंबई में उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव तक लाया गया था, लेकिन जनसमर्थन के कारण वे डिगे नहीं। उनकी इसी सख्ती और नियमों के प्रति अटूट निष्ठा के कारण उन्हें कई बार पुरस्कारों से नवाजा गया है, लेकिन साथ ही उन्हें बार-बार तबादलों का सामना भी करना पड़ा है।

अश्विनी भिडे बनीं BMC की पहली महिला आयुक्त

इस प्रशासनिक फेरबदल में एक और ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री की अतिरिक्त मुख्य सचिव अश्विनी भिडे को बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) का नया आयुक्त नियुक्त किया गया है। 154 साल पुराने बीएमसी के इतिहास में इस शक्तिशाली पद को संभालने वाली भिडे पहली महिला अधिकारी बनी हैं। तुकाराम मुंढे और भिडे जैसे कड़क अधिकारियों को नए वित्त वर्ष की शुरुआत में अहम जिम्मेदारियां देकर सरकार ने प्रशासन में पारदर्शिता और गति लाने का संकेत दिया है। हालांकि, मुंढे के समर्थकों का मानना है कि उन्हें किसी भी विभाग में टिक कर काम करने का पर्याप्त समय नहीं दिया जाता, जिससे उनकी दूरगामी योजनाओं पर असर पड़ता है।

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