अनुराधा पौडवाल का सरकार पर निशाना, राम मंदिर में दान चोरी हुई, ऐसे भारत विश्वगुरु कैसे बनेगा?

Ram Mandir Donation Theft: प्लेबैक सिंगर अनुराधा पौडवाल ने राम मंदिर में दान चोरी और 93,000 स्कूल बंद होने का मुद्दा उठाते हुए सरकार के 2047 तक भारत को विश्वगुरु बनाने के दावे पर तीखा तंज कसा।
Singer Anuradha Paudwal hits out at the government over Ram Mandir donation theft and closure of schools, questioning the vision of India becoming Vishwaguru.
अनुराधा पौडवाल
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Ram Mandir Donation Theft Anuradha Paudwal Interview: प्रसिद्ध गायिका अनुराधा पौडवाल ने एक इंटरव्यू के दौरान राम मंदिर में कथित दान चोरी के मुद्दे और 2047 तक भारत को विश्वगुरु बनाने के दावे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने व्यवस्था और जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं देश की छवि पर सवाल खड़े करती हैं।

'विश्वगुरु बनने के लिए पहले व्यवस्था सुधरे'

अनुराधा पौडवाल ने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक उनके मन में भी यह विश्वास था कि भारत विश्वगुरु बनेगा, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखकर उनकी सोच बदली है। उन्होंने कहा, "कुछ साल पहले तक मेरे भी मन में था कि विश्वगुरु बनेंगे, लेकिन अभी मैं देख रही हूं कि विश्वगुरु को उल्टा करने वाली चीजें ज्यादा हो रही हैं। बंद करो ये नॉनसेंस।"

राम मंदिर की घटना का किया जिक्र

इंटरव्यू के दौरान उन्होंने राम मंदिर में कथित दान चोरी का उल्लेख करते हुए कहा कि जब आस्था के सबसे बड़े केंद्रों में भी ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि यदि देश को विश्वगुरु बनाना है तो पहले उन मूल्यों और आदर्शों पर अमल करना होगा, जिनकी बात की जाती है।

शिक्षा व्यवस्था पर भी उठाए सवाल

अनुराधा पौडवाल ने शिक्षा के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि देश में बड़ी संख्या में स्कूल बंद पड़े हैं और कहा कि केवल बड़े दावे करने से लक्ष्य हासिल नहीं होंगे। उनके अनुसार, शिक्षा, पारदर्शिता और बेहतर प्रशासन जैसे क्षेत्रों में ठोस सुधार जरूरी हैं।

2047 के लक्ष्य पर जताई राय

भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र और विश्वगुरु बनाने के लक्ष्य पर प्रतिक्रिया देते हुए अनुराधा पौडवाल ने कहा कि पहले उन कमियों की सूची तैयार करनी चाहिए, जिन्हें दूर करना आवश्यक है। उनके मुताबिक, जब तक व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक ऐसे बड़े लक्ष्यों को हासिल करना चुनौतीपूर्ण रहेगा।

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