साड़ी में पोहा सर्व नहीं करूंगी...जब फडणवीस को अमृता ने कर दिया था इनकार, ट्रोलर्स को दिया कड़ा जवाब

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस अपने बेबाक अंदाज से एक बार फिर ट्रोलर्स को करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि ट्रोल्स बैकग्राउंड म्यूजिक जैसे होते हैं।
Amruta Fadnavis
अमृता फडणवीस (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Amruta Fadnavis News: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस अपने बेबाक अंदाज और स्पष्ट विचारों के लिए जानी जाती हैं। उनके हर कदम और बयान पर लोगों की प्रतिक्रिया देखने को मिलती है। हाल ही में जब उनसे इस पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ प्लेटफॉर्म ऐसे हैं, जो जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने का काम करते हैं।

एक मीडिया चैनल के कार्यक्रम में अमृता फडणवीस ने कहा कि अब उन्होंने आलोचना को समझने और उससे निपटने का तरीका सीख लिया है। उनका कहना था कि हर आलोचना से असहमति जरूरी नहीं है, लेकिन यह देखना जरूरी है कि आलोचना किस उद्देश्य से की जा रही है। उन्होंने कहा कि मूल मुद्दों से ध्यान नहीं हटना चाहिए।

ट्रोलिंग पर बेबाक जवाब

ट्रोलिंग को लेकर उन्होंने कहा कि यह केवल उनके बारे में नहीं है बल्कि समाज की हर महिला से जुड़ा मुद्दा है। उनके अनुसार, “ट्रोल्स बैकग्राउंड म्यूजिक जैसे होते हैं – आप चाहें तो उससे परेशान हो सकते हैं या फिर उस धुन पर नाच सकते हैं। यह आप पर निर्भर करता है कि आप इसे कैसे लेते हैं। सबसे अच्छा विकल्प है कि इसे अनदेखा करें और अपनी बात मजबूती से कहते रहें।”

पुरानी यादें साझा कीं

अमृता फडणवीस ने अपनी पुरानी यादें भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि लगभग 10 साल पहले वे एक मैग्जीन के कवर पेज पर आई थीं। उस दौरान उनका बयान था– “मैं साड़ी पहनकर पोहा परोसना नहीं चाहती थी।”

परंपरा पर अपनी सोच

अमृता ने बताया कि "यह तब की बात है जब दीन हमारी शादी से पहले मुझसे पहली बार मिलने वाले थे। मैं साड़ी पहनकर उन्हें पोहा खिलाने की पारंपरिक परंपरा का पालन नहीं करना चाहती थी।" उन्होंने कहा कि शादी से पहले जब उनकी पहली मुलाकात देवेंद्र फडणवीस से कराई जा रही थी तो परिवार की इच्छा थी कि वह पारंपरिक तरीके से साड़ी पहनकर पोहा परोसें। लेकिन उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया क्योंकि यह उन्हें सहज नहीं लगा।

अमृता ने कहा कि आज लोग उन्हें जैसे हैं वैसे स्वीकारते हैं और उनके चुनाव का सम्मान करते हैं। इसी कारण वे वही करती हैं, जिसमें उन्हें सुकून और खुशी मिलती है।

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