मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन का ऐतिहासिक चरण, विक्रोली से 21 किमी लंबी अंडरग्राउंड सुरंग की खुदाई आज से शुरू

Bullet Train Project: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत विक्रोली में 5 जुलाई से 21 किमी लंबी भूमिगत सुरंग की खुदाई शुरू हो गई है। यह टीबीएम मीठी नदी और ठाणे खाड़ी के नीचे से गुजरेगी।
NHSRCL commenced the crucial 21 km underground tunneling for the Mumbai-Ahmedabad Bullet Train from Vikhroli using advanced TBMs, passing under the Mithi River.
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Mumbai Ahmedabad Bullet Train Project: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में भूमिगत निर्माण कार्य अब निर्णायक चरण में पहुंच गया है। 5 जुलाई से विक्रोली में अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीन के जरिए 21 किलोमीटर लंबी सुरंग की खुदाई शुरू होगी। इसी के साथ ही इस सुरंग के निर्माण से परियोजना को नई गति मिलेगी। टीबीएम घनी शहरी आबादी, मीठी नदी और ठाणे खाड़ी के नीचे से सुरक्षित सुरंग का निर्माण करेगी।

इसके साथ ही देश की पहली हाई स्पीड रेल परियोजना के सबसे चुनौतीपूर्ण इंजीनियरिंग कार्यों में से एक को तेजी मिलने जा रही है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है और जून के अंत तक परियोजना के कई महत्वपूर्ण चरण पूरे कर लिए गए हैं। 508 किलोमीटर लंबी इस परियोजना में अब तक 356 किलोमीटर वायाडक्ट और 452 किलोमीटर पिलर का निर्माण पूरा हो चुका है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत

21 किलोमीटर लंबे भूमिगत सुरंग निर्माण को तेजी मिली है। मई में विक्रोली स्थित शाफ्ट में पहली टीबीएम का कटरहेड उतारा गया था। इसी महीने दूसरी टीबीएम को घणसोली स्थित सावली शाफ्ट से विक्रोली की दिशा में उतारा गया। विक्रोली से शुरू होने वाली टीबीएम लगभग 6 किलोमीटर की खुदाई करते हुए घनी शहरी आबादी और मीठी नदी के नीचे से गुजरकर बीकेसी में निर्माणाधीन मुंबई बुलेट ट्रेन स्टेशन तक पहुंचेगी।

दूसरी टीबीएम का कटरहेड भी घणसोली के सावली शाफ्ट में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है। 3,000 टन से अधिक दोनों टीबीएम मशीनों की असेंबली पूरी हो चुकी है। 13.6 मीटर व्यास और लगभग 350 टन वजन वाला कटरहेड टीबीएम की मुख्य शील्ड असेंबली का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

21 किमी लंबी सुरंग

बीकेसी से शीलफाटा के बीच 21 किमी लंबी सुरंग बनाई जा रही है, जिसमें टीबीएम और एनएटीएम दोनों तकनीकों का इस्तेमाल होगा। इसमें 7 किमी हिस्सा ठाणे खाड़ी के नीचे होगा घणसोली-शीलफाटा के 5 किमी हिस्से का निर्माण एनएटीएम से पूरा हो चुका है, जबकि घणसोली से बीकेसी तक 16 किमी सुरंग की खुदाई टीबीएम से की जाएगी।

परियोजना की प्रमुख प्रगति

  • 209 रूट किमी (418 ट्रैक किमी) आरसी ट्रैक बेड का निर्माण पूरा
  • 198 रूट किमी के लिए ट्रैक स्लैब का निर्माण पूर्ण
  • 85 रूट किमी पर ट्रैक स्लैब बिछाने व सीमेंट एस्फाल्ट मोर्टार इंजेक्शन का कार्य पूरा
  • 196 रूट किमी पर विद्युतीकरण का कार्य आगे बढ़ा
  • 8,800 से ज्यादा ओवरहेड इलेक्ट्रिफिकेशन स्थापित किए गए

हर चरण में आगे बढ़ रही बुलेट ट्रेन

  • एनएचएसआरसीएल के अनुसार गुजरात के वलसाड की एकमात्र पर्वतीय सुरंग पूरी हो चुकी है, जबकि पालघर की सात में से तीन सुरंगों का ब्रेकथ्रू सफलतापूर्वक हो चुका है।
  • साबरमती, सूरत और ठाणे के तीनों रोलिंग स्टॉक डिपो का निर्माण जारी है। परियोजना के सभी 12 बुलेट ट्रेन स्टेशनों पर काम चल रहा है, जबकि गुजरात के 8 स्टेशन अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं।
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