

- लोकमित्र गौतम
अगर इस समय महाराष्ट्र में सरकार और विपक्ष के बीच महाराष्ट्र से विभिन्न उद्योग प्रोजेक्टों के बाहर जाने को लेकर राजनीतिक हंगामा जारी है तो यह बिलकुल बेमतलब नहीं है. इसमें कोई दो राय नहीं है कि महाराष्ट्र आज भी तमिलनाडु के बाद देश का दूसरे नंबर का सबसे बड़ा औद्योगिकृत राज्य है. लेकिन यह भी सही है कि पिछले दस वर्षों में महाराष्ट्र पहले से दूसरे नंबर पर आया है.
पिछले साल तकनीकी रूप से भले शिंदे सरकार ने साबित कर दिया हो कि चार मेगा परियोजनाएं- वेदांता-फॉक्सकॉन, टाटा एयरबस, सैफरन प्रोजेक्ट और बल्क ड्रग पार्क महाराष्ट्र से बाहर न गई हों बल्कि यहां आई ही नहीं थी, लेकिन चिंता तो इस बात की होनी चाहिए थी कि देश के सबसे अच्छे इन्फ्रास्ट्रक्चर के बाद भी आखिर ये परियोजनाएं यहां क्यों नहीं आयीं? हैरानी यह है कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और भाजपा सरकार इन परियोजनाओं के प्रदेश में न आने से चिंतित नहीं है बल्कि उन्हें संतोष है कि इन्होंने महाराष्ट्र में आने का एमओयू ही नहीं साइन किया था.
सुना जा रहा है कि मुंबई और अहमदाबाद के बीच एक अदृश्य होड़ शुरू हो गयी है. बड़े औद्योगिक प्रोजेक्टों के अंतत: गुजरात जैसे पड़ोसी राज्यों में स्थानांतरित होने के बारे में मौजूदा सरकार को चिंता तो करनी ही होगी. वेदांता-फॉक्सकॉन सेमीकंडक्टर प्लांट (1.54 लाख करोड़ रुपये) का था, बल्क ड्रग पार्क (5,000 करोड़ रुपये), सैफ्रान रखरखाव, मरम्मत और ओवरहा हब (1,234 करोड़ रुपये) और एयरबस-टाटा विमान विनिर्माण संयंत्र (22,000 करोड़ रुपये). ये सब प्रोजेक्ट महाराष्ट्र में होते तो निश्चित रूप से 2 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलता.
मैग्नेटिक महाराष्ट्र निवेश शिखर सम्मेलन का पहला संस्करण फरवरी 2018 में मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) में आयोजित किया गया था. ‘मैग्नेटिक महाराष्ट्र : कन्वर्जेंस 2018’ में 12.1 लाख करोड़ रुपये के 4,106 निवेश प्रतिबद्धताओं पर हस्ताक्षर किए गए थे. दो साल बाद, एमवीए सरकार ने शिखर सम्मेलन का दूसरा संस्करण आयोजित किया और दावा किया गया कि 1.29 लाख करोड़ रुपये के 56 समझौता ज्ञापनों पर हऊतार किए गए. ‘महाराष्ट्र के आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23’ के अनुसार, नवंबर 2022 तक गुजरात ने 98,159 करोड़ रुपये के निवेश के साथ 168 प्रौद्योगिक परियोजनाओं को मंजूरी दी थी और कर्नाटक ने 68,931 करोड़ रुपये के निवेश के साथ 97 परियोजनाओं को मंजूरी दी थी. इसके विपरीत, महाराष्ट्र में 211 परियोजनाओं से 35,870 करोड़ रुपये का निवेश हुआ.
इन आंकड़ों में 100 प्रतिशत निर्यातोन्मुखी इकाइयां, औद्योगिक उद्यमियों के ज्ञापन और आशय पत्र के माध्यम से निवेश जैसे निवेश शामिल हैं. संयोग से, औद्योगिक परियोजनाओं को आकर्षित करने के मामले में महाराष्ट्र ने 2021 में गुजरात और कर्नाटक दोनों को पीछे छोड़ दिया था. अगस्त 1991 में उदारीकरण नीति को अपनाने के बाद से, महाराष्ट्र में नवंबर 2022 तक 17.4 लाख करोड़ रुपये के निवेश के साथ कुल 21,442 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई. फिर ऐसा क्या हुआ कि 2023-24 में महाराष्ट्र फिसड्डी साबित हो रहा है और शिंदे सरकार इसी बात पर खुश है कि ये प्रोजेक्ट तो यहां आये ही नहीं थे? कालीन के नीचे कचरा छिपाने से सच्चाई नहीं छिपेगी.