बड़ी मूर्तियों का समुद्र में होगा विसर्जन, बॉम्बे हाईकोर्ट में पेश हुआ हलफनामा

Ganesh Chaturthi 2025: महाराष्ट्र सरकार ने बड़ी गणेश मूर्तियों का समुद्र में विसर्जन करने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में एक हलफनामा पेश किया है। इसमें पर्यावरण के साथ आवश्यक उपाय भी बताये गए हैं।
गणेश प्रतीमा विसर्जन (pic credit; social media)
गणेश प्रतीमा विसर्जन (pic credit; social media)
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Immersion of Ganesh idol: पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हुए एक निश्चित ऊंचाई वाली घरेलू गणेश प्रतिमाओं को झील में विसर्जित किया जाएगा, जबकि सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडलों की बड़ी प्रतिमाओं को पारंपरिक समुद्र में विसर्जित किया जाएगा। इस संबंध में राज्य सरकार ने बुधवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में एक हलफनामा पेश किया है। साथ ही कहा कि पर्यावरण के संबंध में आवश्यक उपाय किए जाएंगे।

सरकार की पहल से बड़ी गणेश प्रतिमा को समुद्र में विसर्जित करने का विकल्प मिला है। राज्य के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री आशीष शेलार ने राज्य के राजीव गांधी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आयोग से एक अध्ययन कराने का अनुरोध किया था। क्योंकि उन्हें डर था कि पीओपी पर प्रतिबंध से लाखों मूर्तिकारों की नौकरियां खत्म हो जाएंगी और इस बड़े उद्योग की आर्थिक व्यवहार्यता प्रभावित होगी।

आयोग ने पीओपी और पर्यावरण पर उनके प्रभाव का अध्ययन करने के लिए डॉ. अनिल काकोडकर की अध्यक्षता में एक अध्ययन समूह का गठन किया और सरकार को कुछ सिफारिशें और सुझाव दिए। केंद्रीय पर्यावरण विभाग द्वारा न्यायालय में रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के बाद न्यायालय ने पीओपी के उपयोग पर प्रतिबंध हटा लिया था।

बड़ी गणेश प्रतिमा का विसर्जन समुद्र में

राज्य सरकार से इस संबंध में हलफनामा प्रस्तुत करने को कहा गया कि बड़ी गणेश प्रतिमा का विसर्जन कहां किया जाएगा। सरकार ने डॉ. काकोदकर समिति के आधार पर बड़ी मूर्तियों के विसर्जन के लिए एक अध्ययन किया और बुधवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में एक हलफनामा प्रस्तुत किया गया। मुख्य न्यायाधीश आलोक अराधे और न्यायमूर्ति संदीप मार्ने की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। राज्य के अटॉर्नी जनरल बीरेंद्र सराफ ने राज्य सरकार की नीति प्रस्तुत की।

कोर्ट में आज भी जारी रहेगी सुनवाई

इस बीच सरकार ने यह रुख अपनाया है कि विशेष रूप से मुंबई में प्रतिष्ठित एवं बड़ी गणेश प्रतिमाओं का समुद्र में विसर्जन परंपरा का सम्मान करते हुए किया जाएगा। पारिस्थिति की संतुलन को ध्यान में रखते हुए अधिकतम घरेलू एवं सीमित ऊंचाई की छोटी मूर्तियों के विसर्जन के लिए कृत्रिम तालाबों की व्यवस्था पूर्व की भांति रहेगी।

गणेशोत्सव की परंपरा सौ वर्षों से भी पुरानी

मुंबई के सार्वजनिक गणेशोत्सव की परंपरा सौ वर्षों से भी अधिक पुरानी है। सरकार ने रुख अपनाया है कि त्योहार और गणेश प्रतिमा विसर्जन की पूरी परंपरा बिना किसी व्यवधान के बरकरार रहेगी और पर्यावरण के प्रति जागरूक रहने के लिए कुछ उपाय किए जाएंगे। बुधवार को अदालत ने दलीलें भी सुनी। इस मामले पर गुरुवार को फिर सुनवाई की जाएगी।

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