

वित्त विभाग ने सरकारी विभागों को खर्च में 20% तक कटौती की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए हैं।
दिवाली से पहले किसानों को 5,000 रुपये की सहायता के लिए लगभग 5,000–6,000 करोड़ रुपये की जरूरत का अनुमान है।
लाडकी बहिण योजना, शिक्षा, स्वास्थ्य और छात्रवृत्ति के बजट पर संभावित असर अभी स्पष्ट नहीं है।
Government Spending Cuts Drought Relief Fund: महाराष्ट्र में सूखे के संकट और राज्य के राजस्व पर बढ़ते दबाव के बीच सरकार खर्चों में कटौती के विकल्प तलाश रही है।
राज्य के वित्त विभाग ने सभी सरकारी विभागों को अपने खर्च में 20 प्रतिशत तक कटौती की संभावनाओं की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।इसका उद्देश्य अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण लगाकर सूखा प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए अतिरिक्त धन उपलब्ध कराना बताया जा रहा है।
वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बीच महाराष्ट्र के राजस्व पर दबाव बढ़ने की बात सामने आई है। वस्तु एवं सेवा कर (GST), राज्य उत्पाद शुल्क, स्टांप ड्यूटी और वाहन कर से होने वाली आय में कमी की जानकारी दी जा रही है।
वहीं, सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों पर बढ़ते खर्च के कारण वित्तीय प्रबंधन की चुनौती भी बढ़ गई है। ऐसे में नई खरीद, विज्ञापन और नए विकास कार्यों पर होने वाले खर्च की समीक्षा की जा सकती है।
खर्च में कटौती के दौरान आम जनता से जुड़ी कल्याणकारी योजनाओं को प्राथमिकता देने की बात कही जा रही है। हालांकि, ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिण योजना’, किसान कर्जमाफी, शिक्षा, स्वास्थ्य और विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं के बजट पर इसका क्या असर होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। इन योजनाओं को लेकर अंतिम निर्णय सामने आने के बाद ही स्थिति साफ होगी।
सूखा प्रभावित किसानों को राहत देना सरकार के सामने बड़ी चुनौती है। किसानों को दिवाली से पहले प्रति किसान 5,000 रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है। इसके लिए लगभग 5,000 से 6,000 करोड़ रुपये की जरूरत होने का अनुमान है। इसके अलावा, 34,000 करोड़ रुपये की किसान कर्जमाफी योजना का वित्तीय बोझ भी राज्य सरकार पर है।
फसलों को हुए नुकसान का पंचनामा पूरा होने के बाद सूखा राहत के लिए आवश्यक धनराशि का अधिक स्पष्ट अनुमान सामने आएगा। महाराष्ट्र सरकार को केंद्र से भी आर्थिक सहायता मिलने की उम्मीद है। ऐसे में वित्त विभाग के निर्देशों के बाद सरकारी खर्चों में कितनी कटौती होती है और सूखा प्रभावित किसानों के लिए कितनी राशि उपलब्ध कराई जाती है, इस पर नजर रहेगी।