अकोला में 3 मार्च को दिखेगा 'ग्रस्तोदित' चंद्रग्रहण: 20 मिनट के अद्भुत नजारे ; जानें ग्रहण योग का असर

Akola Chandra Grahan: 3 मार्च को अकोला में 20 मिनट के लिए ग्रस्तोदित चंद्रग्रहण दिखेगा। शाम 6:27 बजे चंद्रोदय के साथ ग्रहण का नजारा शुरू होगा। विश्वभारती केंद्र ने इसे देखने की अपील की है।
Akola will witness a 'Grastodit' Lunar Eclipse on March 3 for 20 mins. Starting at 6:27 PM moonrise, this rare celestial event is a treat for skywatchers.
अकोला चंद्रग्रहण (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Grastodit Chandra Grahan News: अकोला प्रकृति का अद्भुत खेल यानी सूर्य और चंद्र ग्रहण। जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, तब कुछ समय के लिए चंद्रमा पृथ्वी की छाया में ढक जाता है। यह एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है, जिसका आनंद लेने का आह्वान विश्वभारती केंद्र ने किया है।

इस वर्ष कुल चार ग्रहण होंगे दो सूर्य और दो चंद्र लेकिन हमारे क्षेत्र से केवल एक ही ग्रहण दिखाई देगा। यह चंद्रग्रहण 3 मार्च को होगा। इसकी खासियत यह है कि यह चंद्र उदय से पहले ही लग जाएगा, इसलिए हमें चंद्रमा ग्रहणावस्था में उदित होता दिखाई देगा। इसे ही ग्रस्तोदित चंद्रग्रहण कहा जाता है।

पूर्वी भारत में यह ग्रहण अधिक समय तक और खग्रास स्थिति में दिखाई देगा, जबकि पश्चिमी भारत में यह खंडग्रास स्थिति में और कम समय तक देखा जा सकेगा। अकोला क्षेत्र में ग्रहण का कालावधी केवल 20 मिनट रहेगा। चंद्रोदय का समय शाम 6:27 बजे है, इसलिए पूर्व क्षितिज पर इसे देखना सुविधाजनक होगा।

इस समय चंद्रमा सिंह राशि में मद्या नक्षत्र के साथ रहेगा

इस समय चंद्रमा सिंह राशि में मघा नक्षत्र के साथ रहेगा। वहीं ऊपर मिथुन राशि में गुरु ग्रह तेजस्वी रूप से दिखाई देगा। ग्रहण जैसी घटनाएं न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होती हैं, बल्कि समाज में इनके प्रति उत्सुकता भी रहती है। विश्वभारती केंद्र ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस अद्भुत प्राकृतिक घटना का आनंद लें और इसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें। अधिक जानकारी और मार्गदर्शन के लिए विश्वभारती केंद्र उपलब्ध रहेगा।

गर्भवती स्त्रियां रखें ध्यान

ग्रहण के समय गर्भवती स्त्रियों को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए क्योंकि गर्भस्थ शिशु के शरीर में ग्रहण के कारण विकार उत्पन्न होने की सम्भावनाऐं अधिक से अधिक होती हैं, ग्रहण के समय हानिकारक विकरणें अनवरत प्रवाहित होती रहती हैं, चन्द्र और सूर्य ग्रहण के समय पराबैंगनी, गामा जैसी अन्य विकरणें निकलती हैं, सामान्य तौर पर ओजोन की परत उन्हें सोख कर आमजन तक नहीं पहुंचने देती, लेकिन ग्रहण काल में ये विकरणें गर्भ में पल रहे कोमल शिशु के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकती हैं।

ग्रहण योग

चन्द्रमा मन का कारक होता है, जब कभी राहु के द्वारा ग्रहण योग बने तो ऐसे समय उत्पन्न होने वाले बालक जीवन में अशान्ति का अनुभव करता है, स्वयं निर्णय लेने में कठिनाइयां आती हैं। मानसिक अस्थिरता और ग्रहण दोष से बचने के लिए सफेद चीजें, चीनी, चावल, दही आदि का दान करना चाहिए। चन्द्रमा के मंत्रों का जप करने से चन्द्रमा बलवान होता है, ग्रहण के बाद ऐसे बालकों को पूर्णिमा के दिन चांदी से निर्मित अर्द्धचन्द्रमा चन्द्रमा के मंत्रों द्वारा अभिमंत्रित कर गले में धारण कराना चाहिए।

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