NEET पेपर लीक जांच में सबसे अनोखा मोड़; सबूतों की तलाश में लातूर के 50 कबाड़ व्यापारियों से पूछताछ करेगी CBI

NEET Paper Leak Scrap Dealers Investigation: नीट पेपर लीक मामले में नया मोड़। सबूतों और प्रश्नपत्रों की तलाश में लातूर के 50 कबाड़ व्यापारियों से पूछताछ करेगी सीबीआई।
NEET Paper Leak Latur
नीट पेपर लीक मामले में कबाड़ी व्यापारियों की भी जांच (फोटो क्रेडिट-X)
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NEET Paper Leak Latur: लातूर और पुणे को केंद्र बनाकर चलाए जा रहे नीट पेपर लीक सिंडिकेट के खिलाफ सीबीआई का शिकंजा हर गुजरते दिन के साथ कसता जा रहा है। अब तक की जांच में जहां डिजिटल सबूतों को डिलीट करने और नोट्स को जलाने की बातें सामने आई थीं, वहीं अब इस मामले में एक नया सनसनीखेज पहलू जुड़ गया है। जांच एजेंसियों को खुफिया सूत्रों से जानकारी मिली है कि लातूर के कुछ नामचीन कोचिंग संचालकों और बिचौलियों ने कानून के हाथ उन तक पहुंचने से पहले ही अपने कमरों और कार्यालयों की सफाई की और कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों को आनन-फानन में कबाड़ के रूप में बेच दिया।

इस सूचना के मिलते ही सीबीआई के आला अधिकारियों ने लातूर शहर के कबाड़ बाजार का पूरा ब्योरा तलब किया है। शहर के अलग-अलग कोनों से करीब 50 ऐसे कबाड़ खरीदारों और रद्दी गोदाम के मालिकों को चिन्हित किया गया है, जिन्होंने पिछले एक पखवाड़े के भीतर शैक्षणिक परिसरों या संदिग्धों के ठिकानों से भारी मात्रा में कागज खरीदे थे। पुलिस और जांच अधिकारियों की टीमें अब इन व्यापारियों के बही-खातों और गोदामों में डंप पड़े कचरे के ढेरों की बारीकी से जांच करने की तैयारी में हैं।

क्या कबाड़ की आड़ में बेचे गए लीक प्रश्नपत्र?

सीबीआई के सामने इस समय सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह है कि आखिर परीक्षा खत्म होने के तुरंत बाद ऐसी कौन सी मजबूरी थी कि इन दस्तावेजों को रद्दी के भाव बेचना पड़ा? जांच अधिकारियों को अंदेशा है कि जिन छात्रों या अभिभावकों ने लाखों रुपये देकर लीक प्रश्नपत्र हासिल किए थे, उन्होंने पकड़े जाने के डर से उन प्रश्नपत्रों, उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपियों और सॉल्वर गैंग द्वारा तैयार की गई आंसर की (Answer Key) को इसी कबाड़ के ढेर में मिक्स कर दिया। अगर यह रद्दी बरामद हो जाती है, तो यह अदालत में आरोपियों के खिलाफ सबसे बड़ा अकाट्य सबूत साबित होगी।

सबूतों को रीसायकल होने से रोकने की बड़ी चुनौती

जांच एजेंसी सीबीआई के सामने समय की भी भारी कमी है, क्योंकि कबाड़ में बेचे गए कागज और रद्दी बहुत जल्दी रीसाइक्लिंग (Recycling) के लिए आगे पेपर मिलों में भेज दिए जाते हैं। अगर यह रद्दी एक बार रीसायकल प्लांट में चली गई, तो हमेशा के लिए ये अहम सबूत मिट जाएंगे। यही वजह है कि सीबीआई ने स्थानीय पुलिस की मदद से लातूर के सभी प्रमुख रद्दी डीलरों को सख्त हिदायत दी है कि वे फिलहाल खरीदे गए किसी भी कागजी स्टॉक को शहर से बाहर न भेजें और जांच में पूरा सहयोग करें।

लातूर के शिक्षा जगत में फिर मचा हड़कंप

सीबीआई की इस नई और लीक से हटकर की जा रही जांच शैली ने लातूर के शिक्षा माफियाओं और पेपर लीक के खरीदार रसूखदार परिवारों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। अब तक जो लोग यह सोचकर निश्चिंत बैठे थे कि उन्होंने अपने डिजिटल चैट और लिखित नोट्स नष्ट कर दिए हैं, उन्हें अब इस बात का डर सता रहा है कि कबाड़ वाले के गोदाम से उनकी कोई पर्ची या दस्तावेज न मिल जाए। अब पूरे महाराष्ट्र की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि लातूर के इन कबाड़ खानों से नीट घोटाले का कौन सा नया और बड़ा राज बाहर आता है।

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