Jalna में बैंकिंग संकट, निकासी बंद, ऑनलाइन सिस्टम ठप; ग्राहकों की उमड़ी भीड़

Jalna Cooperative Bank Crisis: जालना मर्चेंट्स को-ऑपरेटिव बैंक में भुगतान संकट के चलते ग्राहकों की भीड़ उमड़ पड़ी। निकासी न होने, ऑनलाइन सिस्टम ठप व बढ़ते NPA के कारण जमाकर्ताओं में असुरक्षा बढ़ गई।
Banking Crisis in Jalna: Withdrawals Halted, Online Systems Down; Customers Swarm the Banks
जालना बैंक संकट( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Jalna Withdrawal Issue Bank: जालना शहर की प्रतिष्ठित सहकारी संस्था जालना मर्चेंट्स को-ऑपरेटिव बैंक इन दिनों गंभीर संकट से गुजर रही है। बड़ी सड़क स्थित बैंक की मुख्य शाखा पर गुरुवार को जमा राशि निकालने बैंक के बाहर उमड़े सभी ग्राहकों को भुगतान करने नहीं किया गया।

कुछ ही देर में ऑनलाइन बैंकिंग प्रणाली भी प्रभावित होने से स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई। स्थिति नियंत्रित रखने के लिए देर शाम पुलिस बंदोबस्त तैनात करना पड़ा।

शुक्रवार को भी यही हाल रहा शहर की लगभग सभी शाखाओं के गेट बंद थे, कर्मचारी अंदर मौजूद थे व बाहर ग्राहकों की भीड़ रही। हालात इतने तनावपूर्ण हैं कि कई स्थानों पर बैंक के बाहर ग्राहकों व सुरक्षाकर्मियों के बीच तीखी बहस देखने को मिली।

अन्य शाखाओं पर ताला जड़ दिया गया है करोड़ों रुपये के संदिग्ध कर्ज वितरण, बढ़ते एनपीए, संभावित विलय की चर्चा व बैंक प्रबंधन की कमजोर व्यवस्था से जमाकर्ताओं में असुरक्षा की भावना है।

ग्राहकों व सुरक्षाकर्मियों के बीच हुई तीखी बहस

बैंक का संभावित विलय डोंबिवली नागरी सहकारी बैंक के साथ होने की चर्चा है। प्रबंधन का कहना है कि यह कदम बैंक को मजबूत बनाने के लिए उठाया जा रहा है। कई खाताचारकों को डर है कि कहीं यह फैसला बैंक की कमजोर वित्तीय स्थिति का संकेत तो नहीं पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब बैंक में इतनी बड़ी अनियमितता की आशंका थी, तो प्रबंधन ने समय रहते पारदर्शिता क्यो नहीं दिखाई, जमाकर्ताओं का कहना है कि अगर शुरुआत में ही बैंक प्रशासन स्पष्ट जानकारी देता व ठोस व्यवस्था करता, तो आज इतनी अफरा-तफरी की स्थिति नहीं बनती।

पर्दे के पीछे चल रही साजिश

शहर में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि बैंक में हुआ भारी कर्ज वितरण व उसके बाद की अव्यवस्था केवल कुप्रबंधन का परिणाम नहीं, बल्कि कुछ प्रभावशाली कर्जदारों को बचाने की सभावित साजिश भी हो सकती है कुछ लोगों का आरोप है कि बैंक के कुछा अधिकारी और भ्रष्ट कर्मचारी मिलकर बड़े कर्जदारों के हितों को सुरक्षित करने की कोशिश कर रहे हैं।

54 करोड़ के कर्ज पर उठ रहे सवाल

बताया जा रहा है करीब 54 करोड़ रुपये के कर्ज वितरण को लेकर गंभीर संदेह सामने आए है। वेयर हाउस में में सोयाबीन का स्टॉक गिरवी दिखाकर करीब 177 लोगों को कर्ज दिया गया, बाद में यह सवाल उठने लगे कि जिन गोदामों में माल दिखाया गया था, वहां वास्तव में स्टॉक मौजूद भी था या नहीं।

पूरे मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा की ओर से किए जाने की चर्चा है। हालांकि, प्रबंधक ने लोगों से पैनिक नहीं होने की अपील की है। बैंक की ओर से वितरित कई बड़े कजर्जी की वसूली नहीं होने से पनपीए गैर निष्पादित परिसंपत्ति तेजी से बढ़ने के चलते इसका सीधा असर बैंक की वित्तीय स्थिति पर पड़ा है।

यही वजह है कि बैंक अब खुद को बचाने के लिए विलय (मर्जर) का रास्ता तलाश रही है। हालांकि बैंक प्रबंधन का कहना है कि जमाकर्ताओं की राशि पूरी तरह सुरक्षित है। हालांकि, लगातार बढ़ती भीड़ व लोगों की बेचैनी इस दावे पर सवाल खड़े कर रही है।

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