

Jalgaon Chalisgaon Infant Death: जलगांव एक तरफ सरकार 'बेटी बचाओ' का नारा बुलंद कर रही है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर ऐसा गंभीर सवाल खड़ा हुआ है जिसने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। चालीसगांव तहसील के तहाकली गांव में टीकाकरण के महज 10 मिनट बाद ढाई महीने की मासूम बच्ची की मौत हो गई। घटना के बाद अब सरकारी वैक्सीन की गुणवत्ता, स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और मेडिकल सिस्टम की संवेदनहीनता पर उंगलियां उठने लगी हैं।
सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि मृत बच्ची सचिता बोरसे के पिता दीपक बोरसे भारतीय सेना में कार्यरत हैं और फिलहाल अयोध्या में तैनात होकर देश सेवा कर रहे हैं। सीमा पर देश की रक्षा करने वाले जवान की बेटी को अपने ही राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था नहीं बचा सकी। इस घटना ने सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई उजागर कर दी है।
रिजनों ने आशंका जताई है कि पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि इतनी गंभीर घटना के बावजूद प्रशासन की ओर से न तो स्पष्ट जवाब दिया गया और न ही किसी उच्चस्तरीय जांच की घोषणा की।
परिजनों का आरोप है कि बच्ची को नियमित टीकाकरण के लिए ले जाया गया था, लेकिन वैक्सीन लगने के कुछ ही मिनटों में उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसने दम तोड़ दिया। अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी घटना कैसे हुई। सवाल किया जा रहा है कि क्या वैक्सीन का डोज गलत दिया गया? क्या इस्तेमाल की गई वैक्सीन एक्सपायर्ड थी? क्या टीकाकरण करने वाले कर्मचारियों को पर्याप्त प्रशिक्षण मिला था? घटना के बाद तत्काल उपचार क्यों नहीं मिला? इन सवालों का जवाब अब जिला परिषद स्वास्थ्य विभाग को देना होगा।