धुले ST डिपो की बड़ी लापरवाही; पुणे रूट पर दौड़ रहीं 11 बसें बनीं यात्रियों के लिए 'मौत का जाल'!

Dhule ST Depot: धुले एसटी डिपो द्वारा स्थानीय रूटों पर बसों की कटौती कर उन्हें लंबी दूरी पर भेजने से यात्री परेशान हैं। वहीं बिना आराम यू-टर्न लेने वाली बसें ड्राइवरों के लिए जोखिम बनी हैं।
Dhule MSRTC faces backlash for cutting short-distance rural routes to favor long-distance Pune trips, violating driver rest rules and triggering safety concerns.
धुले एसटी डिपो (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Dhule ST Depot Illegal Passenger Transport: धुले पहले यात्रियों को केंद्र बिंदु मानकर राज्य परिवहन सेवा के ट्रांसपोर्ट की योजना बनाई जाती थी और अलग-अलग डिपो के साथ-साथ आस-पास के जिलों के डिपो से कोऑर्डिनेट करके इस बात का ध्यान रखा जाता था कि एक ही रूट पर पैरेलल रूट न चलें, नतीजतन, यात्रियों को नियमित, सुविधाजनक और भरोसेमंद सर्विस मिल सके। हालांकि, पिछले कुछ सालों में, यात्रियों को ध्यान में रखकर बनाई जाने वाली योजना अब सिर्फ दिखावा ही साबित हो रही है और अब अधिकारियों ने प्लानिंग की जिम्मेदारी को नजरअंदाज कर दिया है।

कम दूरी पर जाने वाली बसों में की कटौती

धुले डिपो से नंदुरबार, शहादा, शिंदखेड़ा, सकरी, शिरपुर, चोपड़ा, अमलनेर, जलगांव, चालीसगांव, संभाजीनगर, नासिक और मालेगांव के रूट पर बड़ी संख्या में पैसेंजर ट्रैफिक होता था। दो साल पहले, क्योंकि इन रूट पर बस रूट काफी अच्छे से प्लान किए गए थे, इसलिए पैसेंजर के पास प्राइवेट ट्रांसपोर्ट पर निर्भर रहने का समय नहीं था। लेकिन, एसटी बेड़े में नई बसों की संख्या कम होने की वजह से कई रूट पर सेवा में रुकावट आई। बसों की कमी को पूरा करने के लिए कॉर्पोरेशन ने किराए पर बसें लेने का फैसला किया। इस फैसले के पीछे मकसद ग्रामीण और मध्यम दूरी के रूट पर रुकी हुई सर्विस को फिर से शुरू करना था। आरोप है कि इन बसों का इस्तेमाल मुंबई, पुणे, पंढरपुर, सूरत, वापी, वडोदरा और अहमदाबाद जैसे लंबी दूरी के रूट पर बहुत ज्यादा किया गया। इस वजह से, चोपड़ा, अमलनेर, शहादा, नंदुरबार, जलगांव जैसे जरूरी कम और मीडियम दूरी के रूट पर ट्रिप की संख्या काफी नहीं रही।

पुणे के लिए 45 बसें

धुले बस स्टैंड से हर दिन पुणे के लिए करीब 45 बस ट्रिप चलती है। इसमें धुले आगार की 14, शिरपुर की 7, शहादा की 5, नंदुरबार की 2, शिंदखेड़ा की 3.अमलनेर की 5, दोंडाईचा की 2, अक्कलकुवा की 2, और कोपरगांव, सासवड, पिंपरी-चिंचवड और शिवाजीनगर की एक-एक बसे शामिल है। खास बात यह है कि घुलिया डिपो की ज्यादातर बसें, शिरपुर की 7 और शहादा की 5 बसें लीज पर है, सवाल यह उठता है कि जब धुले से पुणे रूट पर सीधे यात्रियों की संख्या तुलनात्मक रूप से कम है, तो इस रूट पर बड़ी संख्या में बसें भेजने पर जोर क्यों दिया जा रहा है।

ट्रांसपोर्ट एक्सपर्ट्स की राय

  • ट्रांसपोर्ट एक्सपर्ट्स के अनुसार, अगर इन बसों को चोपड़ा, जलगांव, शहादा और नंदुरबार जैसे रूट्स पर चलाया जाए, तो यात्रियों को काफी राहत मिल सकती है। साथ ही, वर्तमान में बढ़े हुए गैर-कानूनी यात्री यातायात पर भी रोक लग सकती है।
  • धुले-अमलनेर रूट पर हर दिन करीब 50 काली-पीली टैक्सियां चलती है, और नंदुरबार और शहादा रूट पर भी करीच 20-20 टैक्सियों का नेटवर्क चल रहा है।
  • यह संबंधित स्रूट पर यात्रियों की मांग और एसटी सेवाओं की कमी का साफ संकेत है।
  • एक गंभीर मामला सामने आया है कि धुलिया से पुणे के लिए चलने वाली 14 बसों में से 11 एसटी बसे नियमों के अनुसार नहीं चल रही है, जिससे ये बसें यात्रियों के लिए मौत का जाल बन गई है।
  • धुले से पुणे पहुंचने के बाद, ये बसें तुरंत यू-टर्न लेती हैं और धुलिया के लिए निकल जाती हैं।
  • हालांकि बसों को दो ड्राइवर दिए गए हैं, लेकिन आरोप है कि इस तरीके से एसटी नियमों का उल्लंघन होता है।
  •  एसटी सर्कुलर में कहा गया है कि ड्राइवर के लिए 8 से 12 घंटे लगातार स्टीयरिंग ड्यूटी के बाद कम से कम 8 घंटे आराम करना जरूरी है।
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