

Deputy Collector Abhijeet Bhande Suspended: सैकड़ों महिलाओं के यौन शोषण और धोखाधड़ी के आरोपी भोंदू बाबा अशोक खरात मामले (Ashok Kharat Case) में अब राजनीतिक नेताओं के बाद प्रशासनिक अधिकारियों पर भी गाज गिरनी शुरू हो गई है। अशोक खरात के साथ संदिग्ध आर्थिक लेन देन और नजदीकी संबंधों के आरोप में डिप्टी कलेक्टर (उपजिल्हाधिकारी) अभिजीत भांडे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने भांडे के निलंबन के कड़े आदेश जारी किए हैं।
डिप्टी कलेक्टर अभिजीत भांडे और आरोपी अशोक खरात के बीच के संबंधों का खुलासा तब हुआ जब जांच टीम के हाथ दोनों के कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (CDR) लगे। सरकारी पद पर रहते हुए अभिजीत भांडे और भोंदू खरात के बीच कुल 143 बार फोन पर बातचीत हुई थी। कॉल रिकॉर्ड के आंकड़ों के अनुसार
रिकॉर्ड के मुताबिक, 7 जुलाई 2025 को एक ही दिन में 10 बार और 23 नवंबर 2025 को रिकॉर्ड 14 बार दोनों के बीच फोन पर चर्चा हुई थी। इसके अलावा 7 अगस्त 2025 को दोनों के बीच लगातार 11 मिनट तक बात हुई थी।
जांच में यह बात सामने आई है कि अभिजीत भांडे ने डिप्टी कलेक्टर के पद का दुरुपयोग करते हुए अशोक खरात की पत्नी और बेटी के नाम पर जमीनों और विभिन्न संपत्तियों में भारी निवेश किया था। खरात के कई अवैध और संदिग्ध कामों में भांडे की सीधी संलिप्तता और आर्थिक लेन देन के पुख्ता सबूत मिलने के बाद राजस्व मंत्री ने यह बड़ी कार्रवाई की है। इस निलंबन के बाद राजस्व विभाग के अन्य अधिकारियों में भी हड़कंप मच गया है जो किसी न किसी रूप में खरात से जुड़े थे।
इस हाई-प्रोफाइल मामले ने महाराष्ट्र की राजनीति और प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। एनसीपी नेता रूपाली चाकणकर के बाद अब अभिजीत भांडे भी जांच के दायरे में आ गए हैं और जल्द ही उनसे कड़ी पूछताछ होने की संभावना है।
इस मामले पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाते हुए पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि अशोक खरात मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को, चाहे वह कितना भी बड़ा राजनेता या अधिकारी क्यों न हो, बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री के इस कड़े रुख के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है और आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।