

औरंगाबाद : सामान्य तौर पर, भारत और विशेष रूप से महाराष्ट्र (Maharashtra) में पिछले कुछ वर्षों में जलवायु (Climate) में भारी परिवर्तन देखा गया है। राज्य के कुछ हिस्सों में चक्रवात (Cyclones), भारी बारिश (Heavy Rains), बाढ़ (Floods) और सूखे (Drought) जैसी प्राकृतिक आपदाएं (Natural Calamities) देखी जा रही हैं।
राज्य के पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे के निर्देशानुसार प्रदेश के हर शहर का एक्शन प्लान (सीएपी) तैयार किया जा रहा है। इस अवसर पर विश्व संसाधन संस्थान, भारत (डब्ल्यूआरआई) के सदस्यों ने 16 फरवरी को स्मार्ट सिटी मुख्यालय में औरंगाबाद महानगरपालिका कमिश्नर आस्तिक कुमार पांडे के साथ बैठक की।बैठक में चर्चा की गई कि जनभागीदारी के माध्यम से शहर में प्रदूषण को कम करके चक्रवात, अधिक वर्षा, बाढ़ और सूखे जैसे जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान को कैसे कम किया जाए।
जलवायु कार्य योजना या सीएपी योजना तैयार करने के लिए औरंगाबाद महानगरपालिका और अन्य सभी सरकारी विभागों से आदि की जानकारी एकत्र की जाएगी। इनमें जल आपूर्ति, बिजली बोर्ड, वन विभाग, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आदि शामिल हैं। प्रदूषण रहित बिजली की खपत को कम करके हरित भवन को बढ़ावा देने, निजी परिवहन के बजाय सार्वजनिक परिवहन के उपयोग, साइकिल के उपयोग में वृद्धि आदि पर चर्चा की गई।
चार चरणों में सीएपी योजना तैयार की जाएगी। पहले चरण में फरवरी से मार्च तक पानी के उपयोग, वाहनों की संख्या, ठोस कचरा प्रबंधन आदि की जानकारी संबंधित विभाग से एकत्र की जाएगी। दूसरे चरण में अप्रैल से जून तक का नक्शा या योजना तैयार की जाएगी। तीसरे चरण में जनभागीदारी बढ़ाने के लिए गैर सरकारी संगठन शामिल होंगे और सीएपी के अंतिम चरण को सितंबर से जनवरी तक अंतिम रूप दिया जाएगा। बैठक में अपर आयुक्त बीबी नेमाने, रवींद्र निकम,शहर अभियंता एस डी पानझडे, उपायुक्त सौरभ जोशी, अपर्णा थेटे, संतोष टेंगले, उप निदेशक नगर नियोजन एबी देशमुख, चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी डॉ पारस मंडलेचा, कार्यपालक अभियंता बीडी फड़, डब्ल्यूआरआई उपस्थित थे। डब्ल्यूआरआई के प्रतिनिधि मुक्ता सालुंके, लुबेना सहित अन्य सदस्य सहित सभी विभागाध्यक्ष, वार्ड अधिकारी उपस्थित थे।