

Water Wastage Fine 25000 Action In Sambhajinagar: घर में नल से पानी आया और जरूरत से ज्यादा पानी भरकर उसे सड़क पर बहा दिया, वाहनों की धुलाई में इस्तेमाल किया या नल खुला छोड़कर पानी की बर्बादी की, तो अब जेब पर भारी पड़ेगा।
छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका ने पानी की बर्बादी रोकने के लिए सख्त कार्रवाई का निर्णय लिया है। पानी की बर्बादी करने पर पहली बार पांच हजार रुपये, दूसरी बार 10 हजार रुपये और तीसरी बार 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
तीसरी बार नियम तोड़ने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया जाएगा। महानगरपालिका 15 दिन तक नागरिकों को जागरूक करेगी और इसके बाद 15 अक्टूबर से दंडात्मक कार्रवाई शुरू होगी।
महानगरपालिका आयुक्त अमोल येडगे ने गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में पानी की बर्बादी के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शहर में कुछ स्थानों पर नल से पानी भरने के बाद उसे सड़क पर बहाने, वाहनों की धुलाई करने तथा बिना आवश्यकता नल खुला छोड़ देने के मामले सामने आए हैं।
सीमित जलस्रोतों के बीच इस तरह पानी की बर्बादी को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। पहले नागरिकों को पानी बचाने के लिए जागरूक किया जाएगा, लेकिन इसके बाद भी लापरवाही जारी रही तो सीधे जुर्माना लगाया जाएगा।
महानगरपालिका की प्रस्तावित कार्रवाई में पानी की बर्बादी करने वालों पर चरणबद्ध तरीके से जुर्माना लगाया जाएगा। पहली बार पानी की बर्बादी करते पकड़े जाने पर पांच हजार रुपये का जुर्माना होगा। दूसरी बार वही गलती दोहराने पर 10 हजार रुपये का दंड लगाया जाएगा।
तीसरी बार नियम तोड़ने पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाने के साथ संबंधित व्यक्ति के खिलाफ पुलिस थाने में केस भी दर्ज किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि शहर में पानी के प्रति जिम्मेदारी की भावना पैदा करना है।
आयुक्त येडगे ने बताया कि इस वर्ष अच्छी बारिश होने तथा जायकवाड़ी बांध में पानी की आवक बढ़ने से फिलहाल जल संग्रहण की स्थिति संतोषजनक है। वर्तमान में बांध में लगभग 80 प्रतिशत पानी है। हालांकि पिछले वर्ष इसी अवधि में जलसंग्रहण लगभग 98 प्रतिशत था। ऐसे में पिछले वर्ष की तुलना में इस बार स्थिति पूरी तरह समान नहीं है। आगामी गर्मी में पानी की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए अभी से पानी का संयमित उपयोग करना जरूरी है।
नई जलापूर्ति योजना का काम जारी रहने के कारण शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में जलापूर्ति का अंतर अलग-अलग है। कुछ क्षेत्रों में चार दिन के अंतराल पर, जबकि कुछ क्षेत्रों में छह से सात दिन के अंतराल पर पानी पहुंच रहा है। ऐसे में जिस दिन नल में पानी आए, उस दिन आवश्यकता के अनुसार ही पानी भरकर रखने और इसके बाद नल बंद रखने की अपील महानगरपालिका ने की है। घरों में पानी का अनावश्यक भंडारण करने और फिर अतिरिक्त पानी सड़क पर बहाने से बचने को कहा गया है।
आयुक्त येडगे ने साफ किया कि सीधे दंडात्मक कार्रवाई करने से पहले अगले 15 दिनों तक व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाएगी। इसके लिए कचरा संग्रहण वाहनों के माध्यम से पानी बचाने का संदेश नागरिकों तक पहुंचाया जाएगा।
सार्वजनिक स्थानों पर भी पानी के विवेकपूर्ण उपयोग के संबंध में जानकारी दी जाएगी। इस अवधि के बाद 15 अक्टूबर से पानी की बर्बादी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाएगी।
पानी की बर्बादी के साथ ही महानगरपालिका ने अवैध नल कनेक्शनों के खिलाफ भी सख्ती का संकेत दिया है। जिन नागरिकों ने अनधिकृत नल कनेक्शन ले रखे हैं, उन्हें अपने कनेक्शन को नियमानुसार अधिकृत कराने की अपील की गई है।
जांच के दौरान अवैध नल कनेक्शन पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा। महानगरपालिका की टीम पानी की बर्बादी के साथ नल कनेक्शनों की भी जांच करेगी।
छत्रपति संभाजीनगर मनपा प्रशासन का कहना है कि शहर में पानी की उपलब्धता सीमित है और गर्मी के दिनों में इसकी मांग बढ़ जाती है। इसलिए नल में पानी आने को पानी की खुली छूट न समझते हुए प्रत्येक बूंद का उपयोग जरूरत के अनुसार करना होगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अब पानी की बर्बादी पर समझाइश के बजाय जुर्माने और कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाया जाएगा।