किसान बेहाल, सरकार सत्ता के नशे में मस्त, मराठवाड़ा में सूखे पर कांग्रेस का हमला, प्रति किसान 1 लाख की मांग

Sambhajinagar Marathwada Drought Relief Demand:मराठवाड़ा में सूखे और जलसंकट पर कांग्रेस नेता रेहाना चिश्ती ने महाराष्ट्र सरकार को घेरा। प्रभावित किसानों के लिए 1 लाख और नियमित जलापूर्ति की मांग की।
Sambhajinagar Rehana Chishti Congress Marathwada drought Compensation Demand
कांग्रेस मराठवाड़ा सूखा मुआवजा की मांगसोर्स: सोशल मीडिया
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Highlights

  • कांग्रेस की रेहाना चिश्ती ने मराठवाड़ा के सूखा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के बाद सरकार पर सवाल उठाए।

  • प्रभावित किसानों को एक लाख रुपये और खेत मजदूरों को 25 हजार रुपये देने की मांग।

  • कई गांवों में कुएं और बोरवेल सूखने तथा 15 दिन में एक बार पानी मिलने का दावा।

  • खरीफ फसलों की बर्बादी से किसानों को आर्थिक नुकसान होने की बात कही।

  • पशुओं के लिए पानी और प्रभावित गांवों में नियमित पेयजल आपूर्ति की मांग।

Sambhajinagar Rehana Chishti Congress Marathwada drought Compensation Demand: मराठवाड़ा में सूखे और जलसंकट को लेकर कांग्रेस की महाराष्ट्र सहप्रभारी रेहाना चिश्ती ने राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने प्रभावित किसानों को एक लाख रुपये और खेत मजदूरों को 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने के साथ गांवों में नियमित पेयजल आपूर्ति की मांग की।

मराठवाड़ा में सूखे पर कांग्रेस का सरकार से सवाल

छत्रपति संभाजीनगर, मराठवाड़ा में सूखे और जलसंकट के बीच किसानों तथा खेत मजदूरों की मुश्किलें बढ़ने का मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस ने महाराष्ट्र सरकार से तत्काल राहत देने की मांग की है। कांग्रेस की महाराष्ट्र सहप्रभारी रेहाना चिश्ती ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में किसान फसल नुकसान और आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, लेकिन सरकार प्रभावित परिवारों को पर्याप्त सहायता देने में नाकाम रही है।

मराठवाड़ा के 11 दिवसीय दौरे के दौरान सूखा प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का जायजा लेने के बाद चिश्ती ने प्रेस वार्ता में सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसानों और ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

कई गांवों में 15 दिन में एक बार पानी मिलने का दावा

रेहाना चिश्ती ने बताया कि मराठवाड़ा के कई गांवों में कुएं और बोरवेल सूखने से पेयजल संकट गहरा गया है। कुछ स्थानों पर 15 दिन में एक बार पानी की आपूर्ति होने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीणों के साथ पशुओं को भी परेशानी हो रही है।

उन्होंने सरकार से प्रभावित गांवों में नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने और पशुओं के लिए भी पानी की व्यवस्था करने की मांग की। चिश्ती ने आशंका जताई कि यदि अगले डेढ़ महीने में स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर सकते हैं।

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खरीफ फसलों को नुकसान, लागत निकालना मुश्किल

चिश्ती के अनुसार, किसानों ने खरीफ की बुवाई के लिए प्रति एकड़ करीब 35 से 40 हजार रुपये खर्च किए। लेकिन बारिश की कमी के कारण सोयाबीन, कपास और अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा है। इससे किसानों के लिए खेती में लगाई गई पूंजी निकालना मुश्किल हो गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावित किसानों को पर्याप्त फसल बीमा और आर्थिक सहायता नहीं मिल रही है। चिश्ती ने कहा कि ऐसे हालात में पांच हजार रुपये की सहायता पर्याप्त नहीं है और राहत राशि बढ़ाने की जरूरत है।

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किसानों को एक लाख, खेत मजदूरों को 25 हजार देने की मांग

कांग्रेस नेता ने प्रत्येक प्रभावित किसान को एक लाख रुपये और खेत मजदूरों को 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की। उन्होंने कहा कि फसल नुकसान और पानी की कमी से प्रभावित परिवारों को राहत देने के लिए सरकार को जल्द निर्णय लेना चाहिए।

चिश्ती ने आरोप लगाया कि एक ओर किसान अपनी आजीविका बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि राहत उपायों में देरी होने पर ग्रामीण क्षेत्रों में असंतोष बढ़ सकता है।

प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेता मौजूद

प्रेस वार्ता में कांग्रेस जिला अध्यक्ष किरण पाटील डोणगावकर, शहराध्यक्ष एड. सय्यद अक्रम, वरिष्ठ नेता इब्राहिम पठाण और जगन्नाथ काले सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

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