

31 अक्टूबर रियायती शुल्क पर आवेदन करने की अंतिम तारीख थी।
अंतिम दिन गुंठेवारी विभाग और लेखा विभाग में लंबी कतारें लगीं।
अब प्रशासन के फैसले पर हजारों परिवारों की नजर है।
Gunthewari Regularisation 800 Applications: अपने आशियाने और भूखंड को कानूनी मान्यता दिलाने की उम्मीद में शनिवार को छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका में नागरिकों का सैलाब उमड़ पड़ा। गुंठेवारी नियमितीकरण योजना के तहत रियायती शुल्क पर आवेदन करने की 31 अक्टूबर की अंतिम तारीख होने के कारण सुबह से ही मनपा मुख्यालय में लोगों की भारी भीड़ जुटने लगी।
किसी को अपने वर्षों पुराने मकान को कानूनी मान्यता दिलाने की जल्दी थी, तो कोई भूखंड के नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी करने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगा रहा था। दिनभर में करीब 800 आवेदन जमा होने की जानकारी सामने आई है। अंतिम दिन बढ़ते दबाव के कारण कार्यालयीन समय के बाद भी कामकाज जारी रखना पड़ा।
अंतिम तारीख को लेकर पिछले कई दिनों से नागरिकों में असमंजस और जल्दबाजी का माहौल था। शनिवार को यह स्थिति और गंभीर हो गई। सुबह से ही गुंठेवारी विभाग में आवेदन जमा करने वालों की कतारें लग गईं। दस्तावेजों की जांच, आवेदन प्रक्रिया और शुल्क जमा करने के लिए नागरिकों को अलग-अलग विभागों में जाना पड़ा।
समयसीमा समाप्त होने के डर से अनेक नागरिक अपने आवश्यक दस्तावेज लेकर सीधे मनपा मुख्यालय पहुंचे। दोपहर के बाद भीड़ लगातार बढ़ती गई और शाम होते-होते परिसर में काफी गहमागहमी दिखाई देने लगी। आवेदन जमा करने के बाद शुल्क भरने के लिए नागरिकों को लेखा विभाग का रुख करना पड़ा। शाम के समय यहां सबसे अधिक भीड़ दिखाई दी।
शुल्क जमा करने के लिए लंबी कतारें लग गईं। अंतिम दिन होने के कारण प्रत्येक नागरिक जल्द से जल्द प्रक्रिया पूरी करना चाहता था। बढ़ती भीड़ के चलते शुल्क जमा करने में भी समय लग रहा था। नागरिकों की संख्या को देखते हुए कर्मचारियों को कार्यालयीन समय के बाद भी काम करना पड़ा। देर रात तक आवेदन और शुल्क जमा करने की प्रक्रिया जारी रहने की संभावना जताई गई।
अंतिम दिन नागरिकों की परेशानी उस समय और बढ़ गई, जब शुल्क जमा करने के लिए नकद राशि की आवश्यकता सामने आई। कई नागरिक ऑनलाइन भुगतान की तैयारी करके मनपा पहुंचे थे। उन्हें उम्मीद थी कि डिजिटल माध्यम से शुल्क जमा करने की सुविधा मिलेगी, लेकिन नकद भुगतान की व्यवस्था के कारण उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ा।
अनेक लोगों के पास पर्याप्त नकदी नहीं थी। ऐसे में कुछ नागरिकों को पैसे निकालने के लिए बाहर जाना पड़ा, जबकि कुछ ने परिचितों से नकदी की व्यवस्था की। अचानक बढ़ी भीड़ और भुगतान की सीमित व्यवस्था ने पूरी प्रक्रिया को और कठिन बना दिया।
दूसरी ओर, गुंठेवारी नियमितीकरण योजना की समयसीमा बढ़ाने की मांग भी लगातार तेज हो रही है। नागरिकों और विभिन्न संगठनों का कहना है कि हजारों परिवारों ने जीवनभर की कमाई लगाकर अपने मकान और भूखंड बनाए हैं। दस्तावेजों की कमी, आर्थिक कठिनाइयों और प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण अनेक लोग निर्धारित समय में नियमितीकरण नहीं करा पाए हैं। ऐसे नागरिकों को एक और अवसर मिलना चाहिए। इसलिए योजना को कम से कम दो महीने का विस्तार देने की मांग की जा रही है।
अंतिम दिन छत्रपति संभाजीनगर मनपा में उमड़ी भीड़ ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि गुंठेवारी नियमितीकरण को लेकर नागरिकों में कितनी बेचैनी है। एक ही दिन में करीब 800 आवेदन पहुंचना इस योजना के प्रति लोगों की रुचि और समयसीमा के दबाव, दोनों को दर्शाता है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अंतिम दिन प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाने वाले नागरिकों को प्रशासन अतिरिक्त अवसर देगा या नहीं। दो महीने की मोहलत की मांग पर महानगरपालिका प्रशासन क्या रुख अपनाता है, इस पर हजारों परिवारों की निगाहें टिकी हुई हैं।