संभाजीनगर में सूखे की मार झेल रहे मछुआरों को मिलेगी राहत, किसानों की तर्ज पर मुआवजा देने की तैयारी

Fisherman Compensation Maharashtra: संभाजीनगर में सूखे और तालाबों में गाद से मत्स्य व्यवसाय प्रभावित हुआ है। मंत्री नितेश राणे ने प्रभावित मछुआरों को किसानों की तर्ज पर मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं।
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नितेश राणे(सोर्सः सोशल मीडिया)
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Fishermen Relief Compensation Nitesh Rane: छत्रपति संभाजीनगर जिले में सूखे की स्थिति गंभीर होती जा रही है और इसका असर अब मत्स्य व्यवसाय पर भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है। बारिश की कमी के कारण तालाबों में पानी का स्तर घटने तथा बड़ी मात्रा में गाद जमा होने से मछली उत्पादन प्रभावित हुआ है।

मत्स्य व्यवसाय एवं बंदरगाह विकास मंत्री नितेश राणे ने सोमवार को जिलाधिकारी कार्यालय में पत्रकार वार्ता में जिले में मत्स्य व्यवसाय पर सूखे के प्रभाव को गंभीर बताते हुए प्रभावित मछुआरों को राहत देने के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।

गाद और पानी की कमी से उत्पादन प्रभावित

नितेश राणे ने बताया कि पिछले दो दिनों से वे सूखाग्रस्त क्षेत्रों में मत्स्य उत्पादन की स्थिति का निरीक्षण कर रहे हैं। शिवना टाकली तालाब के जलस्तर में करीब 34 प्रतिशत की कमी पाई गई है। वहीं सोमठाणा तालाब में गाद की मात्रा करीब 60 प्रतिशत तक पहुंच गई है। कई अन्य तालाबों में भी पानी की कमी और गाद के कारण मत्स्य उत्पादन प्रभावित होने की स्थिति सामने आई है।

उन्होंने कहा कि मत्स्य व्यवसाय को कृषि का दर्जा मिलने के बाद प्रभावित मछुआरों को किसानों की तर्ज पर नियमानुसार नुकसान भरपाई और सरकारी सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। नुकसान का आकलन कर पंचनामा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू है।

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तालाबों से गाद निकालने का भेजा प्रस्ताव

तालाबों से गाद निकालने के लिए मत्स्य विभाग ने जलसंधारण और निर्माण विभाग को प्रस्ताव भेजे हैं। जिला नियोजन समिति से भी आवश्यक सहायता लेने पर विचार किया जा रहा है। राणे ने कहा कि सूखे से मत्स्य व्यवसाय को हुए नुकसान का वस्तुनिष्ठ आकलन कर प्रभावित मछुआरों की जानकारी संकलित करने के निर्देश दिए गए हैं।

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दोबारा पटरी पर लौटेगा कारोबार

सूखे और गाद की दोहरी मार झेल रहे मछुआरों के लिए सरकार की यह पहल एक बड़ी राहत बनकर आई है। मत्स्य व्यवसाय को कृषि का दर्जा मिलने से न केवल नुकसान का सही आकलन संभव हो सकेगा, बल्कि प्रभावित परिवारों को समय पर वित्तीय मदद भी मिल सकेगी। यदि तालाबों से गाद निकालने और मुआयजा वितरण की प्रक्रिया तेजी से पूरी होती है, तो जिले के मत्स्य कारोबार को दोबारा पटरी पर लाने में बड़ी मदद मिलेगी।

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