

अभिजीत दीपके बोले- सौरव दास और आशुतोष रांका मुझसे बेहतर लीडर हैं।
‘हम एक परिवार हैं, हमें कोई नहीं तोड़ सकता’, दोनों को बताया भाई।
तिहाड़ जेल में बंद दोनों नेता रिहाई के लिए दिल्ली हाईकोर्ट जाएंगे।
Cockroach Janata Party Case: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दोनों नेताओं की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें यह स्वीकार करने में कोई शर्म नहीं है कि सौरव और आशुतोष उनसे बेहतर नेता हैं। दीपके ने दोनों को अपना भाई बताते हुए कहा कि उनके बीच आपसी विश्वास और एकजुटता है।
अभिजीत दीपके ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति उनसे बेहतर है, तो इसे स्वीकार करने में उन्हें कोई परेशानी नहीं है। उन्होंने माना कि सौरव दास और आशुतोष रांका उनसे बेहतर फैसले लेने में सक्षम हैं और अच्छे नेता होने के साथ बेहतर इंसान भी हैं।
दीपके के मुताबिक, नेतृत्व का मतलब हर फैसले में अपनी बात मनवाना नहीं, बल्कि बेहतर राय को स्वीकार करना है। उन्होंने दोनों नेताओं की समझदारी और क्षमता पर गर्व जताया।
सीजेपी संस्थापक ने कहा कि पार्टी के सभी सदस्य एक परिवार की तरह मिलकर काम करते हैं। किसी मुद्दे पर चर्चा के दौरान जिस सदस्य की राय सबसे अच्छी होती है, उसे प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने कहा कि सौरव और आशुतोष उनके भाइयों जैसे हैं और जिस तरह वे उनके लिए खड़े होंगे, उसी तरह वह भी उनके साथ खड़े रहेंगे।
अभिजीत दीपके ने अपनी एकजुटता जाहिर करते हुए कहा कि उनके बीच के रिश्ते को कोई नहीं तोड़ सकता। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब सौरव दास और आशुतोष रांका तिहाड़ जेल में बंद हैं।
जानकारी के मुताबिक, सौरव दास और आशुतोष रांका अपनी रिहाई की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख करने की तैयारी में हैं। दोनों जंतर-मंतर पर अनधिकृत प्रवेश के मामले में उनकी न्यायिक हिरासत बढ़ाने वाले स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (एसईएम) कोर्ट के आदेश को चुनौती देंगे।
इस मामले में एक और अहम घटनाक्रम सामने आया है। दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस से जुड़े मामलों की जांच क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित कर दी है। अब इन मामलों की जांच क्राइम ब्रांच करेगी।
फिलहाल, दोनों नेताओं की रिहाई को लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है। वहीं, अभिजीत दीपके के बयान को पार्टी के भीतर एकजुटता और आपसी भरोसे के संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।