चंद्रपुर: चिमूर-वरोरा राज्य मार्ग पर बस स्टॉप और स्ट्रीट लाइट न होने से बढ़ी परेशानियां, पांदण रास्ते भी बदहाल

Chandrapur Infrastructure: शेगांव और आसपास के 50-60 गांवों के लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बस स्टॉप की कमी, संकरी सड़कें, बंद स्ट्रीट लाइट और बदहाल पांदण रास्तों से नागरिक परेशान हैं।
Local Administration Negligence Chandrapur
पांदण रास्ता प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Local Administration Negligence Chandrapur: ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को लेकर सरकार की ओर से लगातार दावे किए जाते हैं, लेकिन चंद्रपुर जिले के शेगांव सहित आसपास के गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण क्षेत्र का अपेक्षित विकास नहीं हो पाया है। शेगांव तहसील का एक महत्वपूर्ण गांव है, जहां बड़ी बाजारपेठ होने के साथ आसपास के 50 से 60 गांवों के नागरिक खरीदारी के लिए आते हैं।

इस गांव की आबादी 10 हजार से अधिक है। अंग्रेजों के समय से यहां पुलिस थाना कार्यरत है, जिसके अंतर्गत 102 गांव जुड़े हुए हैं। इसके अलावा गांव में 2 स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, पशु चिकित्सालय, गैस एजेंसी, पेट्रोल पंप, कपास जिनिंग, कृषि उपज बाजार समिति, राइस मिल, कृषि केंद्र, बैंक तथा अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान मौजूद हैं। इसके बावजूद नागरिकों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है और ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में विद्यार्थी शिक्षा के लिए शेगांव आते हैं। वहीं किसान, खेत मजदूर, महिलाएं और अन्य नागरिक अस्पताल, किराना सामान तथा कृषि उपयोगी सामग्री की खरीदारी के लिए यहां पहुंचते हैं। लेकिन शेगांव बु., भेंडाला और चारगांव (खु.) में बस स्टॉप की सुविधा नहीं होने से महिलाओं, विद्यार्थियों और बुजुर्गों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।

चंद्रपुर जिले के चिमूर-वरोरा 353E राज्य मार्ग पर स्थित इस क्षेत्र में सड़क संकरी होने के कारण बाजार के दिनों में यातायात जाम की स्थिति बन जाती है। सड़क के बीच बने डिवाइडर पर जगह-जगह कचरा जमा है। वहीं डिवाइडर पर स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था नहीं होने से रात के समय वाहन चालकों को दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है।

किसानों को भी हो रही परेशानी

ग्रामीण क्षेत्रों में पांदण (खेत मार्ग) सड़कों का निर्माण अब भी अधूरा है। बारिश के मौसम में इन रास्तों पर कीचड़ फैल जाता है, जिससे किसानों को खाद, बीज और कृषि सामग्री खेतों तक पहुंचाने में दिक्कत होती है। बैलगाड़ी और अन्य वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित होती है। खेतों में काम करने वाले मजदूरों को भी आने-जाने में परेशानी उठानी पड़ती है।

शुद्ध पेयजल की समस्या

ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई स्थानों पर लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। बारिश के मौसम में दूषित पानी के कारण बीमारियां फैलने की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के कारण उन्हें आवश्यक सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है। नागरिकों ने क्षेत्र के समग्र विकास के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।

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