नवेगांव-नागझिरा: मजदूरों का भारी शोषण; तय मजदूरी 569, मिल रहे सिर्फ 170, फर्जी नामों पर बिल निकालने का आरोप

Maharashtra Forest News: नागझिरा टाइगर रिजर्व के पिटेझरी में आदिवासी मजदूरों का बुरा हाल। 4 महीने से वेतन लंबित, ₹569 के बजाय मिल रहे मात्र 170; फर्जी बिलों के जरिए हक मारने का गंभीर आरोप।
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Nagzira Tiger Reserve News: नागझिरा टाइगर रिजर्व के मुख्य प्रवेश द्वार के पास स्थित पिटेझरी गांव में वन विभाग के कार्यों में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। जंगल संरक्षण कार्यों में लगे आदिवासी मजदूरों को महीनों से मजदूरी नहीं मिलने के कारण उनके सामने रोजीरोटी का संकट खड़ा हो गया है।

मजदूरों का आरोप है कि पिछले 4 महीनों से भुगतान लंबित है, जबकि कुछ को पिछले वर्ष का मेहनताना भी नहीं मिला। इसके साथ ही फर्जी नामों पर बिल निकालने, काम के दिनों में कटौती और तय मजदूरी से बेहद कम भुगतान जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

19 दिन काम, मजदूरी सिर्फ 15 दिन की

पिटेझरी गांव के अधिकांश आदिवासी परिवार वन विभाग के मौसमी कार्यों पर निर्भर हैं। इनमें जंगल सफाई, घास कटाई, फायर लाइन निर्माण और जल संरक्षण जैसे काम शामिल हैं।

मजदूरों के अनुसार

  • 19 दिन काम करने के बावजूद केवल 15 दिन की मजदूरी दी गई
  • तय मजदूरी 569 और 520 रुपये होने के बावजूद
  • वास्तविक भुगतान सिर्फ 170 से 300 रुपये तक किया जा रहा है
  • भूख के कगार पर परिवार

सेवकराम साधुजी उईके ने बताया कि चार महीने से मजदूरी नहीं मिलने से परिवार के सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया है। विश्रांति ज्ञानेश्वर भलावी के अनुसार, “तय मजदूरी से बहुत कम भुगतान किया जा रहा है, जिससे परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।”

फर्जी बिल और शिकायतों की अनदेखी

युवराज व्यंकट भलावी ने बताया कि फायर लाइन के पिछले साल के काम का भुगतान अब तक नहीं मिला। वहीं भोजराम अंताराम भलावी ने आरोप लगाया कि फर्जी नामों पर बिल निकालकर असली मजदूरों का हक मारा जा रहा है। मजदूरों का कहना है कि वन कार्यालय में कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अधिकारियों की अनियमित उपस्थिति और लापरवाही से प्रशासन पर विश्वास कमजोर हो रहा है।

विभाग का दावा: जल्द होगा भुगतान

मामले पर NNTR के उप संचालक प्रीतम सिंह कोडापे ने कहा कि मजदूरी भुगतान के लिए प्रस्ताव भेजा गया है और स्वीकृति मिलते ही भुगतान किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि अनियमितताओं की जांच सहायक वन संरक्षक स्तर पर शुरू कर दी गई है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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