भंडारा: मलेरिया के विरुद्ध जंग में बड़ी जीत, 70 हजार नमूनों की जांच में एक भी स्थानीय मरीज नहीं मिला

विश्व मलेरिया दिवस पर भंडारा जिले से राहत भरी खबर। वर्ष 2026 की पहली तिमाही में 70,967 रक्त नमूनों की जांच में एक भी स्थानीय मलेरिया मरीज नहीं मिला। प्रशासन का लक्ष्य 2030 तक मलेरिया मुक्ति।
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Bhandara World Malaria Day: भंडारा मच्छरों से फैलने वाले मलेरिया के विरुद्ध जंग में भंडारा जिला स्वास्थ्य तंत्र को बड़ी सफलता मिल रही है। 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर सामने आए आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में लाखों रक्त नमूनों की जांच में मलेरिया का प्रमाण नगण्य पाया गया है।

वर्ष 2026 की पहली तिमाही जनवरी से मार्च में 70,967 लोगों की रक्त जांच की गई, जिसमें केवल एक मरीज मिला है, और वह भी दूसरे राज्य का निवासी है। भारत सरकार ने वर्ष 2030 तक देश को मलेरिया मुक्त करने का लक्ष्य रखा है।

भंडारा जिले में राष्ट्रीय कीटजन्य रोग नियंत्रण कार्यक्रम प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच 4,45,439 रक्त नमूनों की जांच की गई। इसमें मलेरिया के केवल 20 और डेंगू के 27 मरीज मिले थे।

वर्ष 2026 के पहले तीन महीनों में 70,967 रक्त नमूने जांचे गए। इसमें मलेरिया का केवल 1 मरीज मिला जो बाहरी राज्य का है। वहीं, डेंगू के लिए 264 नमूनों की जांच में एक भी मरीज नहीं पाया गया। जिले में वर्तमान में स्थानीय स्तर पर एक भी मरीज न होना प्रतिबंधात्मक उपायों की सफलता को सिद्ध करता है।

संवेदनशील तहसीलों पर विशेष नजर जिले में पवनी और साकोली तहसीलों को मलेरिया के लिए अतिसंवेदनशील माना जाता है। इसके अनुसार, सात तहसीलों के 58 गांवों के 10,328 घरों में फॉगिंग और कीटनाशक छिड़काव का कार्य पूर्ण कर लिया गया है।

गर्मियों में तेंदूपत्ता तोड़ने जंगल जाने वाले मजदूरों के स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मई के बाद जब ये मजदूर लौटेंगे, तब विशेष स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से उनकी जांच की जाएगी।

कार्यबल में वृद्धि और जनजागरूकता मलेरिया विभाग की कार्यक्षमता में मैनपावर बढ़ने से काफी सुधार हुआ है। जिले में वर्तमान में 76 स्वास्थ्य कर्मचारी, 26 स्वास्थ्य सहायक और 25 तकनीशियन सहित 90 प्रतिशत पद भरे हुए हैं।

स्वास्थ्य सेवक, आशा वर्कर और एमपीडब्ल्यू के माध्यम से गांवगांव में जागरूकता फैलाई जा रही है। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ। मिलिंद सोमकुवर ने अपील की है कि मलेरिया एनोफिलीज मादा मच्छर के कारण फैलता है, जो साफ पानी में अंडे देती है।

इसलिए सप्ताह में एक दिन ड्राई डे मनाएं, बर्तन साफ रखें और परिसर में स्वच्छता बनाए रखें। ठंड लगकर बुखार आना या उल्टी जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मुफ्त जांच कराएं।

साकोली व पवनी संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष ध्यानजिले को 2030 से पहले ही मलेरिया मुक्त करने के लिए हमारा तंत्र युद्धस्तर पर काम कर रहा है।

इस वर्ष की पहली तिमाही में 70 हजार से अधिक रक्त नमूनों की जांच के बाद भी एक भी स्थानीय मरीज न मिलना हमारे अभियान की सफलता है। साकोली और पवनी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर हमारा विशेष ध्यान है।

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