महाराष्ट्र का ‘फिश हब’ बन रहा भंडारा: उत्पादन 8400 टन पार, मछुआरों की आय में बढ़ोतरी

महाराष्ट्र के भंडारा जिले में मत्स्य पालन तेजी से एक संगठित उद्योग के रूप में उभर रहा है। फरवरी तक उत्पादन 8,402 मीट्रिक टन पहुंच चुका है।
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Bhandara News in Hindi : जल संसाधनों से समृद्ध भंडारा जिले में मत्स्य पालन का क्षेत्र अब केवल एक पारंपरिक व्यवसाय न रहकर एक संगठित उद्योग का रूप ले रहा है.सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और मछुआरों के बढ़ते तकनीकी कौशल के कारण जिले में मत्स्य उत्पादन ने नई ऊंचाइयों को छुआ है.

ताजा आंकड़ों के अनुसार, फरवरी के अंत तक जिले का कुल मत्स्य उत्पादन 8,402 मीट्रिक टन तक पहुंच गया है.मत्स्य विभाग का अनुमान है कि चालू सीजन के समापन तक यह उत्पादन 8600 मीट्रिक टन के जादुई आंकड़े को पार कर जाएगा, जो जिले के मत्स्य इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि होगी.

जिले की भौगोलिक स्थिति मत्स्य पालन के लिए अत्यंत अनुकूल है.यहां कुल 21,491 हेक्टेयर जल विस्तार क्षेत्र उपलब्ध है, जिसमें से 15,816 हेक्टेयर क्षेत्र का उपयोग वर्तमान में सक्रिय मत्स्य पालन के लिए किया जा रहा है.पारंपरिक तालाबों और बोडियों के साथसाथ अब खेत तालाबों में भी वैज्ञानिक पद्धति से मछली पालन किया जा रहा है.

विभाग की ओर से जल निकायों का नियमित परीक्षण और नियंत्रित संवर्धन प्रणाली अपनाने के कारण उत्पादन क्षमता में गुणात्मक सुधार आया है.इस वर्ष जिले के विभिन्न जलाशयों में लगभग 451 लाख मत्स्य बीजों का संचयन किया गया है, जिसने उत्पादन की गति को दोगुना कर दिया है.

बाक्स आत्मनिर्भरता और सहकारी तंत्र की मजबूती मत्स्य उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए जिले में मत्स्य जिरे निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया है.17.26 करोड़ जिरे निर्माण के लक्ष्य का एक बड़ा हिस्सा स्थानीय स्तर पर ही पूरा किया गया है.वर्तमान में जिले में 134 मत्स्य व्यवसाय सहकारी संस्थाएं सक्रिय हैं, जिनसे लगभग 11,500 सदस्य जुड़े हुए हैं.ये संस्थाएं न केवल मछुआरों को संगठित कर रही हैं, बल्कि उन्हें बाजार की मुख्यधारा से भी जोड़ रही हैं.

वित्तीय वर्ष 202526 के दौरान 10 प्रमुख सहकारी संस्थाओं को विशेष आर्थिक सहायता प्रदान की गई है, जिससे 244 लाभार्थियों को सीधा लाभ पहुंचा है.इसके अतिरिक्त, मछुआरों को 4,275 किलो आधुनिक जाल और 34 नावें वितरित की गई हैं.

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