उज्जवल निकम छोड़ेंगे देशमुख मर्डर केस! राष्ट्रपति ने राज्यसभा में किया मनोनीत

Ujjawal Nikam in Santosh Deshmukh Murder Case: मुंबई 26/11 आतंकवादी हमले में कसाब को सजा दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले एड. उज्जवल निकम को राष्ट्रपति ने राज्यसभा के सदस्य के रूप में मनोनीत किया।
Ujjawal Nikam in Santosh Deshmukh Murder Case: मुंबई 26/11 आतंकवादी हमले में कसाब को सजा दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले एड. उज्जवल निकम को राष्ट्रपति ने राज्यसभा के सदस्य के रूप में मनोनीत किया।
उज्जवल निकम और संतोश देशमुख (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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Ujjawal Nikam in Santosh Deshmukh Murder Case: मुंबई 26/11 आतंकी हमले में शामिल आतंकी आमिर अजमल कसाब को फांसी सहित कई बड़े केसों में आरोपियों को सख्त सजा दिलाने वाले लोक अभियोजक उज्ज्वल निकम को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यसभा का सदस्य मनोनीत किया है। 13 जुलाई 2025 को एड. निकम को राज्यसभा सदस्य मनोनीत किए जाने के ऐतिहासिक और गौरवशाली क्षण का जश्न जलगांव के बैरिस्टर निकम चौक के पास स्थित उनके आवास पर मनाया गया।

राज्यसभा में नियुक्त के बाद एडवोकेट निकम बीड जिले के मस्साजोग गांव के सरपंच संतोष देशमुख के बहुचर्चित मर्डर केस नहीं लड़ पाएंगे। इस केस में पूर्व मंत्री धनंजय मुंडे के करीबी वाल्मीकि कराड मुख्य आरोपी के तौर पर जेल में बंद है तथा एड. निकम विशेष अभियोजक के रूप में काम कर रहे हैं लेकिन नियमतः राज्यसभा सदस्य के पद पर आसीन व्यक्ति 'विशेष सरकारी अभियोजक' के रूप में काम नहीं कर सकता है।

राज्यसभा सदस्य संसद का सदस्य होता है जो कानून बनाने की प्रक्रिया में भाग लेता है, जबकि सरकारी अभियोजक कार्यपालिका शाखा में सरकार का प्रतिनिधि होता है। वह राज्य और केंद्र सरकार की ओर से किसी मामले में भूमिका निभाता है। इन दोनों जिम्मेदारियों के बीच हितों का टकराव है, इसलिए ये दोनों भूमिकाएं एक साथ नहीं निभाई जा सकती हैं।

कसाब को दिलाई थी फांसी

बाद में उज्ज्वल निकम को 26/11 आतंकी हमला, वर्ष 2003 का गुलशन कुमार हत्याकांड, वर्ष 2010 का शक्ति मिल्स गैंगरेप, कल्याण रेलवे ब्लास्ट (1991), पुणे राठी कांड (1994), गेटवे ऑफ इंडिया-जवेरी बाजार बम ब्लास्ट (2003), लंदन से नदीम का प्रत्यर्पण (2004), गैंगस्टर अबू सलेम केस (2004), प्रमोद महाजन हत्याकांड (2006), डेविड हेडली मामला (2016) सहित कई अन्य सनसनीखेज मामलों में अपराधियों को सजा दिलाने की जिम्मेदारी मिली। 26/11 आतंकवादी हमले के एकमात्र गिरफ्तार आतंकी अजमल कसाब को उन्होंने फांसी के फंदे तक पहुंचाया। उनकी पैरवी की वजह से 628 दोषियों को उम्रकैद तो 37 आरोपियों को फांसी की सजा मिल चुकी है। इन उपलब्धियों की वजह से उन्हें 2016 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।

16,000 से अधिक वोटों से हार गए थे लोस चुनाव

उज्ज्वल निकम ने करीब सालभर पहले अपना सियासी सफर शुरू किया था। 2024 में हुए लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने उन्हें उत्तर मध्य मुंबई लोकसभा सीट से अपना उम्मीदवार बनाया था। उन्हें तत्कालीन सांसद पूनम महाजन का टिकट काटकर उम्मीदवारी दी गई थी लेकिन कांग्रेस के उम्मीदवार वर्षा गायकवाड के खिलाफ मुकाबले में एडवोकेट निकम 16,000 से अधिक वोटों से हार गए थे।

जलगांव में जन्मे निकम

वर्षा को 4,45,545 वोट मिले थे, थे, जबकि निकम को 4,29,031 मिले थे लेकिन कानून के क्षेत्र में एड. निकम के बहुमूल्य योगदान को देखते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किया है। उज्ज्वल निकम का जन्म महाराष्ट्र के जलगांव जिले में वर्ष 1953 के मार्च महीने में हुआ था। निकम की परिवार पहले से ही कानूनी पेशे से जुड़ा रहा है। उनके पिता देवराव माधवराव बैरिस्टर एवं जज रह चुके हैं।

पुणे विश्वविद्यालय से बीएससी की डिग्री लेने के बाद उज्ज्वल निकम ने जलगांव के एसएस मनियार लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई की। उन्होंने जलगांव के जिला अदालत में वकालत शुरू की। बाद में उन्होंने टाडा अदालत में लगभग 14 वर्षों तक अपनी सेवा दी। वर्ष 1993 मुंबई में हुए सीरियल बम धमाकों में लोक अभियोजक नियुक्त किए जाने के बाद एडवोकेट निकम पहली बार सुर्खियों में आए।

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