मराठवाड़ा में पानी का संकट भयावह, बीड के अधिकांश जलाशय खाली; प्रशासन ने पानी चोरी पर दी एफआईआर की चेतावनी

Beed Water Crisis: महाराष्ट्र के बीड जिले में जलसंकट गंभीर रूप ले चुका है। अधिकांश जलाशय सूख चुके हैं और ग्रामीण पानी के लिए लंबी दूरी तय करने को मजबूर हैं। प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
Beed Water Crisis
बीड जल संकट 2026 (सौ. सोशल मीडिया )
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Beed Water Crisis News: महाराष्ट्र में इस समय कई जिलों में भीषण जलसंकट ने हालात गंभीर कर दिए हैं। बीड जिला इस संकट का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है, जहां पानी की कमी ने प्रशासन से लेकर आम जनता तक की चिंता बढ़ा दी है।

बीड जिले में अल नीनो के प्रभाव और कमजोर मानसून के कारण हालात बेहद खराब हो गए हैं। जून का आधा महीना बीत जाने के बाद भी बारिश की कोई खास गतिविधि दर्ज नहीं की गई है।

जिले के हालात ऐसे हैं कि 173 छोटे-बड़े जलाशयों में से 81 पूरी तरह सूख चुके हैं, जबकि 79 जलाशय "डेड स्टोरेज" की स्थिति में पहुंच गए हैं। यानी वहां मौजूद पानी का उपयोग लगभग असंभव हो गया है।

फिलहाल सिर्फ 13 जलाशयों में बेहद सीमित पानी बचा है, जो आने वाले दिनों के लिए पर्याप्त नहीं माना जा रहा। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में ग्रामीण क्षेत्रों में लोग सूखे तालाबों के बीच गड्ढे खोदकर पानी तलाशते नजर आ रहे हैं।

कई गांवों में पीने के पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है और टैंकर सप्लाई पर निर्भरता बढ़ गई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जल स्रोतों से अवैध रूप से पानी निकालने या "पानी चोरी" के मामलों में सीधे एफआईआर दर्ज की जाएगी।

गांवों में पानी के लिए लंबी कतारें

जल संकट का असर अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिखाई दे रहा है। ग्रामीण इलाकों में महिलाएं और बच्चे कई किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर है। शाहपुर और बोरीचीवाड़ी जैसे गांवों में सुबह से ही पानी के टैंकरों के पास लंबी कतारें लग जाती है। कई जगहों पर एक टैंकर पहुंचते ही लोगों में पानी भरने की होड़ मच जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि दिन का बड़ा हिस्सा सिर्फ पानी जुटाने में निकल जाता है।

मराठवाड़ा में सबसे ज्यादा संकट

मराठवाड़ा क्षेत्र में पानी की सबसे खराच स्थिति देखने को मिल रही है। छत्रपति संभाजीनगर, जालना और धाराशिव जिलों के सैकडों गांवों में पीने का पानी बड़ी समस्या बन चुका है। कई गांवों में लोग रोजाना टैंकर का इंतजार करते दिखाई दे रहे है। मराठवाड़ा पहले से ही सूखा प्रभावित इलाका माना जाता है। इस साल कमजोर मानसून और लंबे समय तक पड़ी भीषण गर्मी ने हालात और खराब कर दिए है।

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