

Sambhajinagar Water Supply Project: छत्रपति संभाजीनगर शहर की नई जलापूर्ति योजना के कार्य में हो रही धीमी प्रगति पर बॉम्बे उच्च न्यायालय को औरंगाबाद खंडपीठ की ओर से गठित समिति ने कड़ी नाराजगी जताई है।
हालांकि, समिति के न्यायमूर्ति रवींद्र घुगे व न्या. अभय मंत्री की खंडपीठ ने यह भी विश्वास जताया कि सभी विभाग यदि समन्वय से काम करें, तो 1 मई से पहले जलशुद्धिकरण केंद्र से पानी मुख्य भंडारण टैंक तक पहुंचने की स्थिति में इसका शहर में वितरण शुरू किया जाए।
समिति की अगली बैठक 23 अप्रैल को व न्यायालय में अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी। उच्च न्यायालय के समक्ष पेश समिति की रिपोर्ट में परियोजना के विभिन्न चरणों में हो रही देरी को उजागर किया गया।
विभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में अमृत-2.0 योजना की समीक्षा की गई व ठेकेदार के कामकाज पर असंतोष व्यक्त किया गया, कार्य में तेजी लाने के लिए फ्लाइंग स्क्वॉड व रैपिड रिस्पॉन्स टीम तैनात करने के निर्देश दिए गए हैं।
शहर की कुल 1,911 किमी पाइपलाइन में से करीब 1,300 किमी का कार्य पूरा हो चुका है, पर शेष 600 किमी काम बेहद धीमी गति से चल रहा है। गत तीन महीनों में मात्र 20 किमी कार्य पूरा होने पर समिति ने ठेकेदार से जवाब मांगकर मानव संसाधन बढ़ाकर युद्धस्तर पर काम पूरा करने के निर्देश दिए।
नक्षत्रवाड़ी स्थित 392 एमएलडी क्षमता वाले जलशुद्धिकरण केंद्र का कुछ सिविल कार्य अभी भी अधूरा होने से जरूरी अनुमतियों में देरी हो रही है। क्लोरीन टोनर रूम व लंबित स्लैब कार्य जल्द पूरा करने, अतिरिक्त सच-कॉन्ट्रैक्टर नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
सुनवाई के दौरान मनपा की ओर से एड. संभाजी टोपे, महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण की ओर से वरिष्ठ विधिज्ञ राजेंद्र देशमुख, एनएचएआई की ओर से वरिष्ठ विधिज्ञ संजीव देशपांडे, ठेकेदार कंपनी की ओर से आरएन धोर्डे, एमिकस क्यूरी के रूप में एड. शंभूराजे देशमुख व याचिकाकर्ता एड. अमित मुखेड़कर ने पक्ष रखा।