संभाजीनगर में नदी सीमांकन अभियान तेज, खाम-सुखना नदियों की बाढ़ रेखा तय होगी; अतिक्रमण पर लगेगी लगाम

Sambhajinagar Flood Line: छत्रपति संभाजीनगर में खाम व सुखना नदियों की बाढ़ नियंत्रण रेखा तय करने की प्रक्रिया शुरू। अतिक्रमण रोकने व बाढ़ संकट घटाने के लिए सर्वे तेज।
River demarcation campaign intensifies in Sambhajinagar; flood lines of Kham and Sukhna rivers will be determined; encroachment will be curbed.
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Sambhajinagar River Demarcation: छत्रपति संभाजीनगर शहर से होकर बहने वाली खाम और सुखना नदियों के सीमांकन तथा बाढ़ नियंत्रण रेखा निर्धारण की प्रक्रिया को जलसंपदा विभाग ने गति दे दी है।

वर्षा ऋतु में उत्पन्न होने वाले बाढ़ संकट, नदी पात्र के संकुचन और तटों पर बढ़ते अतिक्रमण को ध्यान में रखते हुए यह महत्वपूर्ण अभियान आरंभ किया गया है। जिलाधिकारी दिलीप स्वामी और महानगरपालिका आयुक्त जी. श्रीकांत की पहल पर सर्वेक्षण कार्य शुरू किया गया है।

विभागीय दल नदी पात्र की वास्तविक चौड़ाई, गहराई और प्राकृतिक प्रवाह दिशा का विस्तृत अध्ययन कर रहा है। इसके आधार पर आधिकारिक बाढ़ नियंत्रण रेखा तय की जाएगी। खाम नदी शहर में लगभग 14.5 किलोमीटर बहते हुए जायकवाड़ी बांध में मिलती है।

सुखना नदी पीसादेवी क्षेत्र से उगम लेकर गारखेडा स्थित सुखना मध्यम परियोजना तक जाती है। खाम नदी का जल प्रवाह हसूल झील के अतिप्रवाह के बाद बढ़ता है।

केंद्र सरकार की नमामि गंगे योजना और राज्य सरकार के माझी वसुंधरा अभियान के अंतर्गत नदी की गहराई और चौड़ाई बढ़ाने के कार्य जारी हैं। फिर भी आधिकारिक सीमांकन के अभाव में अनेक स्थानों पर अतिक्रमण बढ़े हैं।

वर्षा से पूर्व अतिक्रमण हटाने का संकल्प

बाढ़ नियंत्रण रेखा घोषित होने के बाद उसके भीतर आने वाले अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की जाएगी। वर्षा ऋतु से पहले नदी पात्र को अतिक्रमण मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। नदी की अधिकृत सीमा तय होने से बाढ़ संभावित क्षेत्र स्पष्ट होता है।

इससे भविष्य के निर्माण कार्यों पर कानूनी नियंत्रण संभव होता है। आपदा प्रबंधन की योजना सुदृढ़ बनती है और जन तथा थन हानि की आशंका कम होती है। प्रशासन का मानना है कि सीमांकन के बाद नदियों का प्राकृतिक प्रवाह सुरक्षित रहेगा और शहर की बाढ़ समस्या का दीर्घकालीन समाधान संभव होगा।

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