अमृत-2 परियोजना: 107 करोड़ निकाले, 3.5 करोड़ ब्याज मनपा ने चुकाया; जल परियोजना को गति

Sambhajinagar AMRUT 2.0: छत्रपति संभाजीनगर मनपा ने जलापूर्ति योजना के ऋण पर पहली किश्त के रूप में 3.5 करोड़ रुपये ब्याज चुकाया। अमृत-2 परियोजना के लिए हुडको से सॉफ्ट लोन लिया गया है।
AMRUT-2 project: 107 crore withdrawn, 3.5 crore interest paid by the Municipal Corporation; water project gains momentum
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Sambhajinagar Water Supply Project: छत्रपति संभाजीनगर मनपा की नई जलापूर्ति योजना के लिए लिए गए ऋण पर पहले ब्याज की किश्त जमा की गई है। अब तक 107 करोड़ रुपए की राशि निकाली जा चुकी है, जिस पर 3.5 करोड़ रुपये का ब्याज भुगतान मनपा ने किया है।

शहरवासियों को नियमित व पर्याप्त जलापूर्ति उपलब्ध कराने के लिए अमृत 2 योजना के अंतर्गत 2,740 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत है इसमें 70 प्रश खर्च का वहन केंद्र व राज्य सरकारें कर रही हैं। शेष 30 प्रश यानी 822 करोड़ रुपये का हिस्सा मनपा पर आया है।

मनपा की वित्तीय स्थिति कमजोर होने से यह हिस्सा अनुदान के रूप में देने की मांग की गई थी। हालांकि, सरकार ने यह राशि हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन अर्थात हुडको के जरिए सॉफ्ट लोन के रूप में उपलब्ध कराई।

इस ऋण पर 8.90 प्रश की दर से ब्याज लगाया जा रहा है। आयुक्त जी.श्रीकांत ने कहा कि ऋण राशि जरूरत के अनुसार चरणबद्ध तरीके से निकाली जा रही है। जनवरी में 85 करोड़ रुपये व उसके बाद 22 करोड़ रुपए इस तरह कुल 107 करोड़ रुपए मनपा को मिले हैं।

इस राशि पर 3.5 करोड़ रुपये का व्याज हाल ही में जमा किया गया है। परियोजना कार्यों को गति देने के लिए स्वीकृत ऋण में से अतिरिक्त 89 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने हेतु हुडको को प्रस्ताव भेजा गया है।

निधि प्राप्त होने पर परियोजना के आगामी चरणों को तेजी मिलेगी। मनपा पर पहले से मौजूद आर्थिक दबाव के बीच ऋण की अदायगी और ब्याज का बोझ भविष्य में बड़ी चुनौती बन सकता है। प्रशासनिक सूत्रों का मानना है कि वित्तीय अनुशासन बनाए रखना व आय के स्रोत बढ़ाना जरूरी होगा।

2 वर्ष बाद मूल राशि व भुगतान की चुनौती

वर्तमान में मनपा सिर्फ निकाली गई ऋण राशि पर ब्याज का भुगतान कर रही है। दो वर्ष बाद मूल राशि व व्याज दोनों की अदायगी शुरू करने से आर्थिक दबाव बढ़ने की संभावना है।

इस स्थिति में महापौर समीर राजूरकर व प्रशासन के सामने आय बढ़ाने के लिए अलग-अलग उपाय, कर वसूली को मजबूती प्रदान करना, खचों पर नियंत्रण रखने की बड़ी चुनौती होगी।

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