छत्रपति संभाजीनगर के लिए बड़ी खुशखबरी! 12 जून से शुरू होगी नई जलापूर्ति योजना, मिलेगा भरपूर पानी

Sambhajinagar Water Supply: छत्रपति संभाजीनगर की नई जलापूर्ति योजना का संकट दूर हो गया है। उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार, सायफन प्रणाली के जरिए 12 जून से प्रतिदिन 50 एमएलडी पानी की आपूर्ति शुरू होगी
The water crisis in Chhatrapati Sambhajinagar clears up as the new supply scheme via a siphon system at Jayakwadi dam will provide 50 MLD of water daily from June 12.
जलापूर्ति योजना (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Chhatrapati Sambhajinagar Water Supply Project: छत्रपति संभाजीनगर शहर की बहुप्रतीक्षित नई जलापूर्ति योजना के संचालन का रास्ता आखिरकार साफ हो गया है। जायकवाड़ी बांध में लगातार घटते जलस्तर के कारण योजना के प्रारंभ पर मंडरा रहा संकट दूर करने के लिए बुधवार को जायकवाड़ी में उच्चस्तरीय समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में अस्थायी कॉफर डैम को हटाने के बजाय सायफन प्रणाली को अधिक सक्षम बनाकर जल उठाव जारी रखने का निर्णय लिया गया। इसके तहत उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार 12 जून से नई योजना के माध्यम से शहर को प्रतिदिन 50 एमएलडी पानी की आपूर्ति शुरू की जाएगी। बाद में आवश्यकता और उपलब्धता के अनुसार आपूर्ति बढ़ाई जाएगी।

छत्रपति संभाजीनगर मनपा आयुक्त अमोल येडगे, महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण की मुख्य अभियंता मनीषा पलांडे, कार्यकारी अभियंता दीपेंद्र कोराटे तथा जीवीपीआर कंपनी के प्रबंधक खलील खान समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने जैकवेल क्षेत्र का निरीक्षण किया।

समीक्षा के दौरान पाया गया कि कुछ निर्माण कार्य अभी शेष हैं। ऐसे में कॉफर डैम हटाने से परियोजना प्रभावित हो सकती है। इसी कारण फिलहाल इसे यथावत रखने और समानांतर नहर खोदने की तैयारी करने के निर्देश दिए गए। बांध का जलस्तर कम होने से सायफन प्रणाली के सामने तकनीकी चुनौतियां उत्पन्न हो गई थीं।

तीन दिन से बंद है जल उठाव

पिछले तीन दिनों से सायफन प्रणाली से जल उठाव बंद होने के कारण नक्षत्रवाड़ी जल शोधन केंद्र तक पानी नहीं पहुंच सका। इस दौरान ठेकेदार कंपनी द्वारा परिसर में सीमेंट-कंक्रीट से संबंधित विभिन्न निर्माण कार्य किए गए, निर्धारित शटडाउन के कारण ये काम अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं और गुरुवार तक इनके पूर्ण होने की संभावना है।निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद शुक्रवार सुबह से जैकवेल से पानी छोड़ने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके बाद जल शोधन केंद्र में पानी पहुंचने पर नई योजना की अंतिम जांच और वितरण व्यवस्था का परीक्षण किया जाएगा।

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