चिकलथाना एयरपोर्ट विस्तार अटका, 300 से ज्यादा आपत्तियों की सुनवाई पूरी

छत्रपति संभाजीनगर प्रशासन ने चिकलथाना एयरपोर्ट के विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रोसेस शुरू हो गई है।इसके अंतर्गत प्रारंभिक अधिसूचना पर दर्ज हुई 300 से ज्यादा आपत्तियों पर सुनवाई पूरी हो चुकी है।
Chikhalthana Airport
चिखलथाना एयरपोर्ट (सौ. सोशल मीडिया )
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Chhatrapati Sambhaji Nagar News In Hindi: जिला प्रशासन ने चिकलथाना हवाई अड्डे के विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की है। इसके तहत प्रारंभिक अधिसूचना पर दर्ज सभी आपत्तियों पर सुनवाई हुई।

तदुपरांत अंतिम अधिसूचना प्रकाशित होनी थी, परंतु महाराष्ट्र हवाई अड्डा विकास कंपनी की ओर से भूमि अधिग्रहण क्षेत्र में बदलाव किए जाने के चलते पूरी भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पुनः लागू करनी होगी। चिकलथाना हवाई अड्डे का रन-वे बड़ी क्षमता वाले विमानों की लैंडिंग के लिए अपर्याप्त होने से सरकार ने रन-वे की लंबाई बढ़ाने का फैसला किया है।

स्पष्टता के अभाव में रुका काम

उप विभागीय अधिकारी, डॉ वेंकट राठौड़ ने कहा है कि 66 भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया अंतिम चरण में थी। एयरपोर्ट डेवलपमेंट कंपनी ने प्रस्तावित क्षेत्र से कुछ जगह हटाने व कुछ बढ़ाने के लिए कहा है। उसमें पर्याप्त स्पष्टता नहीं होने के चलते प्रक्रिया रोकी गई है।

सरकार ने बजट में 734 करोड़ का किया प्रावधान

इसके लिए 139 एकड़ भूमि की दरकार है। सरकार ने मार्च 2023 के बजट में 734 करोड़ रुपए का वित्तीय प्रावधान किया है। भूमि अधिग्रहण के लिए चयनित उप विभागीय अधिकारी डॉ वेंकट राठौड़ ने 8 जनवरी 2025 को 58 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण की प्रारंभिक अधिसूचना जारी की। तदुपरांत प्रशासन के पास 300 से अधिक आपत्तियां दर्ज कराई गई व उन सभी की सुनवाई की गई। वन, भूमि अभिलेख, लोक निर्माण विभागों ने प्रभावित संपत्तियों का मूल्यांकन पूरा कर लिया है। अब प्रशासन धारा 19 की अंतिम अधिसूचना जारी करने की तैयारी कर रहा है।

8 महीनों की मेहनत पर फिर रहा पानी

महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कंपनी ने अधिग्रहीत किए जाने वाले क्षेत्र में बदलाव का सुझाव दिया है। कंपनी ने जिलाधिकारी दिलीप स्वामी को पत्र भेजकर प्रस्तावित 139 एकड़ भूमि में से 1.5 एकड़ को बाहर करने व दूसरे समूह में 0.16 एकड़ भूमि बढ़ाने का अनुरोध किया है। प्रशासन को अब पूरी भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को नए सिरे से लागू करनी होगी। नतीजतन, गत आठ महीनों से प्रातासन की मेहनत बेकार हो गई है व भूमि अधिग्रहण में और विलंब की प्रबल संभावना है।

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