

Sambhajinagar Abortion Racket Case: छत्रपति संभाजीनगर शहर में उजागर हुए अवैध भ्रूण लिंग जांच और गर्भपात के मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था की भयावह सच्चाई सामने ला दी है। जांच में सामने आया है कि लिंग जांच से लेकर गर्भपात तक का पूरा रैकेट सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा था।
पिछले लगभग डेढ़ वर्ष से बिना किसी डर के यह अवैध धंधा जारी था। इस दौरान कितने भ्रूणों का गर्भपात किया गया और उनका निपटान कैसे किया गया, इसे लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
इस मामले में नर्स वर्षा वावासाहेब जाधव (30), उज्जवला विठ्ठल गायकवाड (35) और डॉक्टर विकास मिठाराम आहेर (32) को गिरफ्तार किया गया है।
मामले की सुनवाई करते हुए प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी ए। वी। मुसले ने तीनों आरोपियों को 13 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। वहीं चौथी आरोपी ज्योती भीमराव पवार फरार है, जिसकी पुलिस तलाश कर रही है।
जांच में यह भी सामने आया है कि सिल्लोड क्षेत्र का एक डॉक्टर इस पूरे रैकेट की अहम कड़ी था। वह पोर्टेबल सोनोग्राफी मशीन लेकर सीधे गर्भवती महिलाओं के घर पहुंचता था और करीब 15 हजार रुपये लेकर अवैध रूप से भ्रूण का लिंग बताता था। पुलिस की नजर से बचने के लिए वह लगातार स्थान बदलता रहता था।
मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष की ओर से सहायक सरकारी वकील सविता हिवराले ने अदालत को बताया कि डेढ़ वर्ष में कितने अवैध गर्भपात किए गए, भ्रूणों का निपटान कैसे किया गया, प्रतिबंधित दवाइयों की आपूर्ति कौन कर रहा था और इस नेटवर्क में कितने डॉक्टर तथा नर्स शामिल हैं, इसकी जाच अभी बाकी है। इसी आधार पर अदालत से आरोपियों की पुलिस हिरासत की मांग की गई, जिसे स्वीकार करते हुए न्यायालय ने तीनों आरोपियों को 13 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
जांच में पता चला है कि लिंग जांच के बाद महिलाओं को डॉक्टर विकास आहेर द्वारा ज्योती पवार के पारा गर्भपात के लिए भेजा जाता था। वहां दवाइयों या अन्य तरीकों से गर्भपात कराया जाता या।
नर्स वर्षों जाधव और उज्वला गायकवाड अलग-अलग स्थानों पर जाकर यह अवैध गर्भपात कराती थी, कई बार गर्भवती महिलाओं के परिजनों से ही सुरक्षित स्थान की व्यवस्था करने की कहा जाता था, जिससे किसी की शक न हो इस अवैध कारोबार में मोटी रकम का लेनदेन होता था।
एका गर्भपात के लिए करीब 80 हजार रुपये वसूले जाते थे, गर्भपात से संबंधित दवाइयाँ की व्यवस्था करने के लिए ज्योती पवार को 25 हजार रुपये मिलते थे।
वहीं गर्भपात करने की जिम्मेदारी वर्षा जाचव निभाती थी, जिसके लिए उसे 15 हजार रुपये दिए जाते थे। इस काम में वर्षा की बहन उर्मिला भी सहयोग करती थी, सभी की भूमिका और भुगतान पहले से तय होने के कारण यह पूरा नेटवर्क व्यवस्थित तरीके से चल रहा था।