वक्फ भूमि पर ई-टॉयलेट की तैयारी? संभाजीनगर मनपा को वक्फ बोर्ड ने भेजा नोटिस

E-Toilet Controversy: छत्रपति संभाजीनगर के गुलमंडी क्षेत्र में दिवान देवढ़ी मस्जिद के पास वक्फ भूमि पर ई-टॉयलेट बनाने की मनपा की योजना पर रोक। वक्फ बोर्ड ने जारी किया नोटिस।
Plans for E-Toilets on Waqf Land? Waqf Board Issues Notice to Sambhajinagar Municipal Corporation
छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Chhatrapati Sambhajinagar Waqf Property Encroachment: शहर के सबसे व्यस्त व्यापारिक केंद्र गुलमंडी क्षेत्र में ई-टॉयलेट निर्माण की योजना कानूनी विवादों में घिर गई है। ऐतिहासिक दिवान देवढ़ी मस्जिद के समीप प्रस्तावित इस परियोजना को लेकर महाराष्ट्र राज्य वक्फ बोर्ड ने कड़ा रुख अपनाया है। बोर्ड ने महानगरपालिका (मनपा) को नोटिस जारी कर इस निर्माण पर स्पष्टीकरण मांगा है और इसे वक्फ कानूनों का उल्लंघन बताया है।

क्या है पूरा विवाद?

विवाद की शुरुआत 18 अप्रैल को हुई, जब स्थानीय समाचारों के माध्यम से यह जानकारी सामने आई कि महानगरपालिका महिलाओं की सुविधा के लिए गुलमंडी क्षेत्र में आधुनिक ई-टॉयलेट बनाने जा रही है। औकाफ संरक्षण मंच ने तुरंत सक्रिय होते हुए भूमि के दस्तावेजों की जांच की। जांच में यह तथ्य सामने आया कि जिस भूमि पर टॉयलेट प्रस्तावित है, वह वक्फ संपत्ति है। मंच ने 22 अप्रैल को राज्य वक्फ बोर्ड में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद बोर्ड ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 24 अप्रैल को मनपा आयुक्त, विभागीय आयुक्त और जिला वक्फ अधिकारी को नोटिस भेज दिया।

धार्मिक कार्यों के लिए आरक्षित है भूमि

वक्फ बोर्ड ने अपने आधिकारिक पत्र में स्पष्ट किया है कि यह विवादित भूमि 'आशूर खाना ताजिया बाराभाई' के नाम पर पंजीकृत वक्फ संपत्ति है। वक्फ कानून के अनुसार, इस संपत्ति का उपयोग केवल धार्मिक कार्यों के लिए ही किया जा सकता है। वक्फ बोर्ड की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी सरकारी या निजी संस्था द्वारा यहाँ किसी भी प्रकार का निर्माण या संरचनात्मक बदलाव करना पूरी तरह अवैध है।

सामाजिक संगठनों ने जताई खुशी

वक्फ बोर्ड की इस त्वरित कार्रवाई का शहर के विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने स्वागत किया है। तहफ्फुज वक्फ फोरम के अध्यक्ष राशिद सिद्दीकी और डॉ. सैयद दिलशाद अली जैदी के प्रयासों की सराहना की जा रही है। संगठनों का कहना है कि प्रशासन को विकास कार्य करते समय ऐतिहासिक और धार्मिक संपत्तियों की कानूनी स्थिति का ध्यान रखना चाहिए।

अब सभी की निगाहें छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका के जवाब पर टिकी हैं। यदि मनपा इस दावे को चुनौती नहीं दे पाती है, तो गुलमंडी जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके में महिलाओं के लिए टॉयलेट की वैकल्पिक जगह खोजना प्रशासन के लिए एक नई चुनौती होगी। प्रशासन और धार्मिक ट्रस्टों के बीच यह विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है, जिससे शहर के व्यस्ततम बाजार में नागरिक सुविधाओं के विस्तार पर फिलहाल प्रश्नचिह्न लग गया है।

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