

Bombay High Court Rejects Law Student Attendance Petition News: बॉम्बे हाई कोर्ट ने कम हाजिरी की वजह से परीक्षा में बैठने से रोके जाने के विश्वविद्यालय के फैसले को चुनौती देने वाली एक लॉ की छात्रा को 'लापरवाह और गैर-जिम्मेदाराना' बयान देने के लिए कड़ी फटकार लगाई है।
कोर्ट ने कहा कि न्याय का मतलब यह नहीं है कि मैं जो चाहूं और जैसे चाहूं, वैसा हो, जस्टिस विभा कंकणवाड़ी और जस्टिस अजीत कडेथंकर की औरंगाबाद बेंच ने 23 वर्षीय एक युवती की याचिका खारिज कर दी। बेंच ने कहा कि झूठे दावों के जरिए अपनी गलतियों को छिपाने की उसकी कोशिश कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है जिससे कानूनी पेशे में उसका करियर खतरे में पड़ सकता है।
अदालत ने फैसले में कहा कि अदालतों में उठाए जाने वाले किसी भी मामले का मकसद नेक नीयत वाला होना है कि जो मैं चाहूं और जिस तरह से मैं कहूं, वही हो।' छत्रपति संभाजीनगर स्थित महाराष्ट्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की एक मास्टर्स की छात्रा (याचिकाकर्ता) ने विश्वविद्यालय के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें अनिवार्य 75 प्रतिशत हाजिरी की शर्त पूरी न कर पाने के कारण उन्हें अंतिम सेमेस्टर की परीक्षा में बैठने से रोक दिया गया था।
अप्रैल में सिंगल बेंच द्वारा छात्रा की शुरुआती अर्जी खारिज करने के बाद उसने एक पुनरीक्षण याचिका दायर की जिसमें विश्वविद्यालय को विशेष रूप से परीक्षा आयोजित कराने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।
याचिकाकर्ता ने अपनी अर्जी में दावा किया था कि उसकी हाजिरी की गणना करने में गलती हुई थी और आरोप लगाया कि कॉलेज ने कुछ छात्रों की अतिरिक्त हाजिरी अपनी मर्जी से लगाई थी।