

Abhijit Dipke Mother Anita Dipke Emotional: आज मेरा बच्चा जीत गया, आज देश के बच्चे आजाद हो गए। ये शब्द उस मां के हैं जिसके बेटे ने पिछले कई हफ्तों से अपनी नींद और सेहत की परवाह किए बिना छात्रों के हक की लड़ाई लड़ी। NEET मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद, आंदोलन का एक प्रमुख चेहरा रहे अभिजीत दीपके की मां की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। उनकी यह प्रतिक्रिया केवल एक राजनीतिक जीत की नहीं, बल्कि एक मां के उस डर और संघर्ष की समाप्ति की है, जिसने उसे हफ्तों तक सोने नहीं दिया।
मीडिया से बात करते हुए अभिजीत की मां अनिता दीपके ने अपने दिल का दर्द साझा किया। उन्होंने बताया कि पिछले कई दिनों से घर का माहौल तनावपूर्ण था। जब उन्होंने टीवी पर देखा कि प्रदर्शन के दौरान उनके बेटे को थप्पड़ मारे गए, तो वह बुरी तरह डर गई थीं। उन्होंने रुंधे गले से कहा, मुझे बहुत डर लग रहा था कि क्या होगा। उस दिन से न मुझे नींद आ रही थी और न ही मैं खाना खा पा रही थी। हम रात के 3-4 बजे तक जागते रहते थे। 7 जून से उनके घर की खुशियाँ जैसे गायब ही हो गई थीं।
अभिजीत की मां ने बताया कि महज 29 साल की उम्र में उनके बेटे ने इतना बड़ा काम किया है कि उन्हें उस पर गर्व है। आंदोलन के दौरान अभिजीत को मच्छरों के बीच सोना पड़ा और कई रातें जागकर बितानी पड़ीं, जिसका असर उनकी सेहत पर पड़ा। वर्तमान में अभिजीत टाइफाइड से जूझ रहे हैं और उनका इलाज चल रहा है,। मां ने बताया कि आज भी वे उनसे फोन पर बात नहीं कर पाई हैं, बस टीवी पर ही अपने बेटे को देख रही हैं।
इस बीच, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सांसद सुप्रिया सुले ने भी इस इस्तीफे को प्रदर्शनकारियों और छात्रों के अटूट दबाव का नतीजा बताया है। उन्होंने हर उस प्रदर्शनकारी को बधाई दी जो अपनी मांग पर डटा रहा। सुले ने स्पष्ट किया कि यद्यपि यह जीत बड़ी है, लेकिन यह अंत नहीं है। वे अभी भी संसद में नीट मुद्दे पर जवाबदेही और व्यापक सुधारों की मांग करती रहेंगी।
अभिजीत दीपके की मां के लिए यह जीत किसी उत्सव से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार ने बच्चों की बात मान ली, यह सबसे अच्छी बात हुई है। आज एक मां की ममता और एक बेटे के संघर्ष की जीत हुई है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है।