

Amravati RTO Road Safety Campaign: अमरावती जिले में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) ने सख्त अभियान छेड़ रखा है। सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और सुरक्षित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आरटीओ द्वारा अत्याधुनिक इंटरसेप्टर वाहनों की मदद से लगातार निगरानी की जा रही है।
पिछले 12 महीनों में जिलेभर में 43,332 वाहनों की जांच की गई, जिसमें नियमों का उल्लंघन करने वाले 14,107 वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई की गई। इनमें सर्वाधिक संख्या दोपहिया वाहन चालकों की रही।
RTO अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में विभाग के पास चार इंटरसेप्टर वाहन और दो उड़नदस्ते उपलब्ध हैं। ये टीमें राष्ट्रीय एवं राज्य महामार्गों सहित प्रमुख मार्गों पर नियमित गश्त कर रही हैं। विशेष रूप से दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है, ताकि तेज रफ्तार, लापरवाही और नियमों की अनदेखी करने वाले चालकों पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।
अमरावती RTO द्वारा केवल ओवरस्पीडिंग पर ही नहीं, बल्कि सीट बेल्ट नहीं लगाने, हेलमेट का उपयोग नहीं करने, मोबाइल फोन पर बात करते हुए वाहन चलाने, गलत दिशा में ओवरटेक करने और शराब पीकर वाहन चलाने जैसे मामलों में भी कार्रवाई की जा रही है। विभाग का मानना है कि आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था से सड़क सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिल रही है और दुर्घटनाओं में कमी लाने की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश सड़क हादसे मानवीय लापरवाही और यातायात नियमों की अनदेखी के कारण होते हैं। ऐसे में इंटरसेप्टर वाहनों की तैनाती न केवल नियम तोड़ने वालों पर अंकुश लगाने का काम कर रही है, बल्कि वाहन चालकों में जागरूकता भी बढ़ा रही है।
RTO उर्मिल पवार ने कहा है कि "इंटरसेप्टर वाहनों का उद्देश्य केवल जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं और जनहानि को रोकना है। वाहन चालक गति सीमा का पालन करें तथा यातायात नियमों का कड़ाई से अनुसरण करें, ताकि सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित हो सके।"
इंटरसेप्टर वाहनों में आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इनमें हाई-स्पीड रडार, स्पीड गन, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) कैमरा, अत्याधुनिक ब्रेथ एनालाइजर और लक्स मीटर जैसे उपकरण लगाए गए है। इनकी सहायता से तेज गति से दौड़ रहे वाहनों की पहचान दूर से ही की जा सकती है।
वाहन का नंबर, गत्ति और अन्य जानकारी तुरत रिकॉर्ड हो जाती है। इसके बाद नियम उल्लंघन की जानकारी ऑनलाइन प्रणाली में दर्ज कर वाहन मालिक के मोबाइल नंबर पर चालान संबंधी संदेश भेज दिया जाता है।