

मुंबई: गृहमंत्री अमित शाह ने संसद के उच्च सदन में अपना संबोधन देते बाबा साहेब आंबेडकर के नाम वाली टिप्पणी के बाद विपक्ष अमित शाह और भाजपा पर हमलावर है। कांग्रेस से लेकर सभी विपक्षी दल अमित शाह के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इधर उद्धव ठाकरे ने भी अमित शाहर पर निशाना साधते हुए उन पर कार्रवाई करने की मांग की है।
शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बुधवार को कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के बारे में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की टिप्पणी भाजपा के अहंकार को दर्शाती है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। ठाकरे ने यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर छत्रपति शिवाजी महाराज और डॉ. आंबेडकर समेत महाराष्ट्र के प्रतीकों व हस्तियों का अपमान करने का आरोप लगाया।
पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने दावा किया कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शह के बिना अमित शाह डॉ. आंबेडकर के बारे में टिप्पणी करने की हिम्मत नहीं कर सकते थे। उन्होंने कहा कि "डॉ. आंबेडकर के बारे में अमित शाह की टिप्पणी भारतीय जनता पार्टी के अहंकार को दर्शाती है और इस टिप्पणी ने पार्टी का असली चेहरा उजागर कर दिया है।'' महाराष्ट्र की खबरें पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
ठाकरे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को डॉ. आंबेडकर के बारे में टिप्पणी के लिए अमित शाह के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। शिवसेना (उबाठा) के नेता ने सवाल किया कि क्या भाजपा के सहयोगी दल तेलुगु देशम पार्टी, जनता दल (यूनाइटेड), रामदास आठवले की रिपल्बिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) और शिवसेना आंबेडकर के बारे में शाह की टिप्पणी से सहमत हैं।
विपक्षी दल कांग्रेस ने मंगलवार को आरोप लगाया था कि राज्यसभा में संविधान पर चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री अमित शाह की टिप्पणी से पता चलता है कि भाजपा और आरएसएस के लोगों में आंबेडकर के लिए बहुत नफरत है।
महाराष्ट्र के कांग्रेस विधायक नितिन राउत ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र में बोलते हुए कहा कि डॉ. गृह मंत्री अमित शाह को बाबा साहब अंबेडकर पर दिए अपने बयान पर माफी मांगनी चाहिए। बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेताओं में बाबा साहब के प्रति काफी नफरत है।
आज सदन में बाबा साहेब का अपमान कर बीजेपी और आरएसएस ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वो तिरंगे के खिलाफ हैं। उनके पूर्वजों ने अशोक चक्र का विरोध किया था। संघ परिवार के लोग पहले दिन से ही भारत के संविधान के स्थान पर मनुस्मृति लागू करना चाहते थे।
(एजेंसी इनपुट के साथ)