उज्जैन में रावण दहन पर विवाद, चार दशहरा समितियों को कानूनी नोटिस, धर्मशास्त्रों का प्रमाण मांगा

Ujjain Dussehra News : उज्जैन में दशहरे से पहले रावण दहन पर विवाद गहरा गया है। अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज ने चार दशहरा समितियों को कानूनी नोटिस भेजकर धर्मशास्त्रों का प्रमाण मांगा।
Legal notice sent to four Dussehra committees in Ujjain
4 दशहरा समितियों को भेजा नोटिसफोटो सोर्स- नवभारत
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Highlights:

  • उज्जैन में रावण दहन की परंपरा पर सवाल उठाते हुए चार दशहरा समितियों को कानूनी नोटिस भेजा गया।

  • महेश पुजारी ने आयोजकों से धर्मशास्त्रों और पुराणों में रावण वध की तिथि का प्रमाण मांगा।

  • लाला ओम अमरनाथ खत्री, कार्तिक मेला, सिद्धवट और शास्त्री नगर दशहरा उत्सव समितियों को नोटिस।

  • रावण दहन की परंपरा बंद करने की मांग के बीच आयोजक समितियों के जवाब का इंतजार।

Ujjain Ravan Dahan Controversy: उज्जैन में दशहरा पर्व से पहले रावण दहन की परंपरा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज ने रावण दहन का आयोजन करने वाली चार समितियों को अधिवक्ता के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजा है।

नोटिस में आयोजकों से पूछा गया है कि आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को रावण वध होने का उल्लेख किस धर्मशास्त्र और पुराण में मिलता है। निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने पर वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। त्योहार से पहले सामने आए इस मामले ने शहर में धार्मिक परंपराओं को लेकर बहस तेज कर दी है।

महेश पुजारी ने अधिवक्ता के माध्यम से भेजा नोटिस

महाकाल मंदिर के पुजारी और अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज के संस्थापक अध्यक्ष महेश पुजारी ने अधिवक्ता अश्विन चौधरी के माध्यम से यह नोटिस भिजवाया है। इसमें रावण से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं और दशहरे पर रावण दहन की परंपरा को लेकर सवाल उठाए गए हैं। समाज ने आयोजन समितियों से अपनी परंपरा के समर्थन में धार्मिक ग्रंथों का प्रमाण प्रस्तुत करने और इस संबंध में स्पष्ट जवाब देने की मांग की है।

इन चार दशहरा समितियों को मिला नोटिस

नोटिस लाला ओम अमरनाथ खत्री दशहरा उत्सव समिति, कार्तिक मेला दशहरा उत्सव समिति, सिद्धवट दशहरा समिति और शास्त्री नगर दशहरा उत्सव समिति को भेजा गया है। इन समितियों से रावण वध की तिथि और दशहरे पर रावण दहन की परंपरा के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया है। नोटिस में कहा गया है कि निर्धारित समय में जवाब नहीं देने पर वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल, इन समितियों की ओर से जवाब या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

रावण दहन की परंपरा बंद करने की मांग

महेश पुजारी का कहना है कि रावण दहन की आड़ में ब्राह्मण समाज का अपमान किया जा रहा है। उन्होंने इस परंपरा को बंद करने की मांग उठाई है। उनका सवाल है कि आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को रावण वध होने का उल्लेख किस धर्मशास्त्र और पुराण में मिलता है। समाज ने आयोजन समितियों से धार्मिक ग्रंथों के आधार पर अपनी परंपरा का औचित्य स्पष्ट करने को कहा है। ये आपत्तियां नोटिस भेजने वाले पक्ष के दावों पर आधारित हैं।

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दशहरे से पहले विवाद, आयोजक समितियों के जवाब का इंतजार

20 अक्टूबर को दशहरा पर्व मनाया जाना है। उज्जैन में भी अलग-अलग स्थानों पर रावण दहन के आयोजन प्रस्तावित हैं। ऐसे में त्योहार से पहले चार समितियों को कानूनी नोटिस भेजे जाने से यह मामला चर्चा में आ गया है। अब सभी की नजर आयोजक समितियों के जवाब पर है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि समितियां नोटिस पर क्या रुख अपनाती हैं और विवाद का समाधान बातचीत से निकलता है या मामला आगे कानूनी प्रक्रिया तक पहुंचता है।

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