

Mahakal Sawari Theme : उज्जैन में भगवान महाकाल की श्रावण-भादौ मास की सवारियां इस बार श्रद्धा के साथ-साथ सामाजिक संदेशों का भी माध्यम बनेंगी। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने वर्ष 2026 की सभी छह सवारियों के लिए अलग-अलग थीम तय की है। इसके तहत हर सोमवार निकलने वाली सवारी में श्रद्धालुओं को कुछ नया और विशेष देखने को मिलेगा। मंदिर समिति का उद्देश्य है कि महाकाल की सवारी केवल धार्मिक परंपरा तक सीमित न रहे, बल्कि इसके माध्यम से संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता का संदेश भी दिया जाए।
महाकालेश्वर मंदिर के प्रशासक एवं अपर कलेक्टर प्रथम कौशिक ने बताया कि सवारियों के सफल और व्यवस्थित संचालन के लिए अलग-अलग प्रभारी और सहायक अधिकारियों की नियुक्ति कर दी गई है। उन्होंने बताया कि इस बार हर सवारी की एक विशेष थीम होगी, जिसके जरिए श्रद्धालुओं को धर्म के साथ समाज और संस्कृति से जुड़ा संदेश भी मिलेगा। इसके अलावा मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आने वाले जनजातीय नृत्य दल भी सवारियों में अपनी रंगारंग प्रस्तुतियां देंगे। पारंपरिक वेशभूषा और लोक नृत्य श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
बाबा महाकाल की पहली सवारी 3 अगस्त को निकलेगी, जिसकी थीम वैदिक उद्बोधन रखी गई है। दूसरी सवारी 10 अगस्त को होगी, जिसमें विभिन्न लोक नृत्यों की प्रस्तुति देखने को मिलेगी। तीसरी सवारी 17 अगस्त को निकलेगी, जिसमें पुलिस, सेना, होमगार्ड, विद्यालयीन और निजी बैंड अपनी प्रस्तुतियां देंगे।
चौथी सवारी 24 अगस्त को होगी, जिसमें पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जाएगा। पांचवीं सवारी 31 अगस्त को निकलेगी, जिसकी थीम 84 महादेव की झांकी होगी। वहीं अंतिम और सबसे भव्य राजसी सवारी 7 सितंबर को निकाली जाएगी, जिसमें सिंहस्थ महापर्व-2028 की झांकी विशेष आकर्षण होगी। इस दौरान ड्रोन के माध्यम से पुष्प वर्षा भी की जाएगी।
राजसी सवारी में सिंहस्थ महापर्व-2028 की झांकी के जरिए आने वाले बड़े धार्मिक आयोजन की तैयारियों और महत्व को श्रद्धालुओं तक पहुंचाया जाएगा। ड्रोन से होने वाली पुष्प वर्षा महाकाल की सवारी की भव्यता को और बढ़ाएगी। मंदिर समिति का कहना है कि इन आयोजनों के माध्यम से धार्मिक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों को भी जोड़ा जा रहा है।