शिवपुरी में 3 दिन तक तड़पता रहा बेजुबान, मौत के बाद लोहे का तार बांधकर तेंदुए को घसीटा, वन विभाग पर उठे सवाल

Forest Department Negligence: शिवपुरी में 3 दिन तक तेंदुआ तड़पता रहा। वन विभाग पर इलाज नहीं कराने का आरोप लगा है। मौत के बाद तेंदुए को लोहे का तार बांधकर खींचा। वन विभाग की टीम पर सवाल उठ रहे हैं।
Shivpuri Leopard Death Case
मृत तेंदुआ (फोटो सोर्स- नवभारत)
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Shivpuri Leopard Death Case: शिवपुरी जिले से वन्यजीव संरक्षण को शर्मसार कर देने वाली एक घटना सामने आई है। यहां सामान्य वनमंडल की बिरदा बीट (बरेट जंगल) में वन विभाग की घोर लापरवाही के कारण एक तेंदुए की तड़प-तड़पकर मौत हो गई। विभाग की संवेदनहीनता का आलम यह रहा कि दम तोड़ने के बाद तेंदुए के शव को लोहे के तार से बांधकर कचरे की तरह घसीटा गया, जिसका फोटोज सामने आई हैं।

जानकारी के अनुसार, 17 मई को वन विभाग की टीम ने इस तेंदुए को गंभीर रूप से घायल अवस्था में देखा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, तेंदुए की हालत इतनी खराब थी कि वह उठने में भी असमर्थ था। उसके पैर की हड्डी टूटकर बाहर आ गई थी और नाक से लगातार खून बह रहा था। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, वन अमले ने न तो उसे समय पर रेस्क्यू किया और न ही चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई।

3 दिन तक तड़पता रहा बेजुबान

तेंदुआ तीन दिनों तक उसी घायल अवस्था में भूख और प्यास से तड़पता रहा। आखिरकार, सही समय पर इलाज न मिलने के कारण उसने दम तोड़ दिया। वन विभाग की असली क्रूरता तेंदुए की मौत के बाद देखने को मिली, जब मृत तेंदुए को झाड़ियों से बाहर निकालने के लिए उसके पैर में लोहे का तार बांधकर उसे पत्थरों पर घसीटा गया।

अफसर दे रहे गोल-मोल जवाब

इस मामले में वन विभाग के अधिकारी पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। डिप्टी रेंजर बाबूलाल नरवरिया का तर्क है कि रेस्क्यू टीम बुलाई गई थी, लेकिन तेंदुआ जंगल के अंदर चला गया था। वहीं, रेंजर गोपाल जाटव ने दावा किया कि तेंदुए की मौत उसकी उम्र पूरी होने के कारण हुई है। अब सवाल ये उठता है कि तेंदुए की मौत प्राकृतिक है तो उसके मुंह से खून और पैर की हड्डी कैसे टूटी?

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