Kuno National Park: कूनो में फिर पसरा सन्नाटा, मादा चीता के चार शावकों की मौत, 'Project Cheetah' पर उठे सवाल

Cheetah cub deaths: कूनो नेशनल पार्क में मादा चीता KGP12 के चार शावकों की मौत ने एक बार फिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जंगली जानवर के शिकार की आशंका
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चार चीता शावकों की मौत , सोर्स : सोशल मीडिया
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Cheetah Cub Deaths: कूनो नेशनल पार्क में मादा चीता KGP12 के चार शावकों की मौत ने एक बार फिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शव आंशिक रूप से खाए हुए मिले हैं, जिससे जंगली जानवर के शिकार की आशंका है।

Cheetah conservation challenges: कूनो नेशनल पार्क में चीतों के संरक्षण को लेकर चल रहे तमाम प्रयासों के बावजूद, एक बार फिर चार चीता शावकों की मौत ने परियोजना की गंभीरता पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। श्योपुर स्थित इस राष्ट्रीय उद्यान में मादा चीता KGP12 के इन चारों शावकों के शव मंगलवार सुबह मॉनिटरिंग टीम को डेन साइट यानी मांद के बेहद करीब पड़े मिले। यह घटना तब सामने आई है जब पार्क में चीतों की सुरक्षा और निगरानी के लिए उच्च स्तरीय तंत्र और व्यापक इंतजाम होने का दावा किया जाता रहा है। ऐसे में इन मौतों का कोई स्पष्ट कारण सामने न आना प्रबंधन की क्षमता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

मांद के पास मिले आंशिक रूप से खाए हुए शव

वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, मॉनिटरिंग टीम को ये चारों शावक अपनी मांद (Den site) के बेहद करीब मृत अवस्था में मिले। प्रारंभिक जांच में शावकों के शरीर पर चोट के निशान पाए गए हैं और उनके शव आंशिक रूप से खाए हुए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी जंगली शिकारी जानवर (जैसे तेंदुआ) ने मांद में घुसकर इन पर हमला किया है।

प्रबंधन की लापरवाही पर उठ रहे सवाल

यह घटना उस समय हुई है जब पार्क प्रशासन चीतों की 'चौबीस घंटे' निगरानी और अत्याधुनिक सुरक्षा घेरे का दावा करता रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि चीते सुरक्षित बाड़ों (Bomas) के भीतर थे, तो बाहरी शिकारी वहां तक कैसे पहुँचा? क्या निगरानी टीम समय पर खतरे को भांपने में विफल रही? इन मौतों ने प्रोजेक्ट चीता की गंभीरता और पार्क के भीतर अन्य शिकारियों के नियंत्रण पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

अब केवल 53 चीते बचे

इन चार शावकों की मृत्यु के बाद, भारत में चीतों की कुल संख्या घटकर अब 53 रह गई है। बार-बार हो रही शावकों की मौतें संरक्षणवादियों के लिए चिंता का विषय बन गई हैं। हालांकि, वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, ताकि मौत के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके।

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