दूसरी बार कूनो से भागा केएपी-2, रणथंभौर के टाइगरों के इलाके में दी दस्तक; वन विभाग ने किया सुरक्षित रेस्क्यू

MP News: चीता केएपी-2 नई टेरिटरी की तलाश में कूनो से निकलकर रणथंभौर पहुंच गया था। निगरानी के बाद वन विभाग ने उसे रेस्क्यू करने का निर्णय लिया। करीब दो घंटे चले ऑपरेशन के दौरान चीते को पकड़ा गया।
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चीता, प्रतीकात्मक इमेज (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Cheetah KAP-2 Rescue: चीता केएपी-2 नई टेरिटरी की तलाश में कूनो से निकलकर रणथंभौर पहुंच गया था। लगातार निगरानी के बाद वन विभाग ने उसे रेस्क्यू करने का निर्णय लिया। करीब दो घंटे चले ऑपरेशन के दौरान चीते को सुरक्षित पकड़ा गया। स्वास्थ्य परीक्षण पूरा होने के बाद उसे दोबारा जंगल में छोड़ दिया गया।

चीता केएपी-2 को कूनो नेशनल पार्क में बसाए गए चीतों में सबसे ज्यादा घूमने वाले चीतों में माना जा रहा है। नए इलाके की तलाश में उसने अप्रैल के दौरान अपना निर्धारित क्षेत्र छोड़ दिया और लगातार कई जंगलों को पार करते हुए राजस्थान की सीमा तक पहुंच गया। वन विभाग की ट्रैकिंग में पता चला कि यह नर चीता मध्य प्रदेश से निकलकर कोटा जिले के इटावा क्षेत्र तक जा पहुंचा था।

कोटा के इटावा से पहुंचा रणथंभौर

बता दें कि चीता इटावा इलाके से होते हुए रणथंभौर टाइगर रिजर्व की तरफ आगे बढ़ गया, जो सवाई माधोपुर क्षेत्र में जा पहुंचा। जानकारी के अनुसार वह 20 दिन से ज्याादा तक सिर्फ फलौदी रेंज के जंगलों में ही घूमता रहा। इसी दौरान उसकी एक्टिविटि पर वन विभाग की नजर बनी हुई थी।

रिहायशी इलाकों में भी पहुंच गया था चीता

कूनो और रणथंभौर दोनों क्षेत्रों की टीमों ने चीते की हर गतिविधि पर लगातार निगरानी रखी हुई थी। शुरुआती चरण में उसे स्वाभाविक रूप से विचरण करने दिया गया था। हालांकि जैसे ही वह आबादी वाले इलाकों की ओर बढ़ने लगा, स्थिति चिंताजनक हो गई। स्थानीय लोगों की सुरक्षा और चीते के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए उसे पकड़ने का निर्णय लिया गया। इसके बाद वन विभाग ने मौके का मूल्यांकन कर तुरंत रेस्क्यू अभियान की रणनीति तैयार कर उसे अमल में लाया।

इससे पहले भी भाग चुका है चीता

गौरतलब है कि, यह पहली बार नहीं है जब केएपी-2 को राजस्थान से वापस लाना पड़ा हो। इससे पहले भी मार्च 2026 में उसे कोटा जिले के इटावा क्षेत्र से रेस्क्यू किया गया था। इसके बावजूद वह एक बार फिर अपनी निर्धारित टेरिटरी से बाहर निकल गया। यह स्थिति कूनो प्रबंधन के लिए नई चुनौती के रूप में सामने आई है। खुले जंगल में छोड़े गए चीते लगातार लंबी दूरी तय कर रहे हैं। ऐसे में वन विभाग उनकी गतिविधियों पर अब और अधिक सतर्कता के साथ नजर रख रहा है।

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