अद्भुत: सागर में 500 साल पुरानी बस्ती के निशान! बंजर जमीन से निकल रहे मनके, 25 हजार रुपये तक कीमत

Ancient Settlement Sagar: सागर के जैतपुर डोमा में मिट्टी से निकल रहे कीमती मनके, ₹25 हजार तक मिल रही कीमत, विशेषज्ञों ने 500 साल पुरानी बस्ती होने का जताया अनुमान।
Villagers in Sagar claim to have discovered ancient beads from barren land, raising the possibility of a 500-year-old settlement in the area
सागर में पुरानी सभ्यता के पदचिन्ह (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Footprints Of 500 Year Old Settelment In Sagar: सागर जिले के देवरी क्षेत्र स्थित जैतपुर डोमा गांव की एक बंजर जमीन इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई है। यहां मिट्टी से निकल रहे छोटे-छोटे कीमती मनकों ने ग्रामीणों के बीच नई उम्मीद जगा दी है। रोज सुबह से शाम तक महिलाएं, पुरुष और बच्चे इस जमीन पर पहुंचकर मनकों की तलाश करते हैं।

ग्रामीणों का दावा है कि अब तक करीब 10 लोगों को ऐसे मनके मिल चुके हैं, जिनमें से एक मनके की कीमत 25 हजार रुपये तक लग चुकी है। इस खबर के फैलते ही आसपास के गांवों के लोग भी यहां पहुंचने लगे हैं।

मौके पर मौजूद रहते हैं खरीदार, तुरंत मिलता है नकद भुगतान

जैतपुर डोमा गांव में मनकों की खरीद के लिए खरीदार भी मौके पर मौजूद रहते हैं। वे मनकों की गुणवत्ता की जांच कर तुरंत नकद भुगतान कर उन्हें खरीद लेते हैं। इससे ग्रामीणों में इन मनकों की खोज का उत्साह और बढ़ गया है। हालांकि, खरीदारों का कहना है कि वे इन मनकों को आगे बेच देते हैं, लेकिन उनका अंतिम उपयोग कहां और किस उद्देश्य से किया जाता है, इसकी जानकारी उन्हें भी नहीं है। फिलहाल यह पूरा कारोबार स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

500 वर्ष पुरानी बस्ती होने की संभावना, विशेषज्ञों ने जताया अनुमान

डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय, सागर के पुरातत्त्व विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. नागेश दुबे के अनुसार प्रारंभिक अध्ययन में यह क्षेत्र लगभग 500 वर्ष पुरानी किसी बस्ती का हिस्सा प्रतीत होता है। उस समय मनकों से बने आभूषण पहनने का प्रचलन था। संभावना है कि उसी काल के ये मनके समय के साथ मिट्टी में दब गए और अब बारिश या मिट्टी कटाव के कारण बाहर आ रहे हैं। वैज्ञानिक भाषा में इन्हें 'बीड' कहा जाता है। हालांकि, इनकी वास्तविक आयु और ऐतिहासिक महत्व का पता विस्तृत पुरातात्विक जांच के बाद ही चल सकेगा।

मुगलकालीन होने की चर्चा, लेकिन आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

ग्रामीणों का कहना है कि इससे पहले देवरी के सिलारी और केसली के मदनपुर गांव में भी इसी तरह के कीमती मनके मिल चुके हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि ये मुगलकालीन आभूषणों में इस्तेमाल होने वाले मनके या बहुमूल्य पत्थर हो सकते हैं।

हालांकि, इस दावे की अभी तक किसी सरकारी एजेंसी या पुरातत्व विभाग ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। ऐसे में जैतपुर डोमा की यह बंजर जमीन फिलहाल लोगों के लिए कौतूहल, उम्मीद और संभावित ऐतिहासिक महत्व का केंद्र बनी हुई है। यदि वैज्ञानिक जांच में इन मनकों का ऐतिहासिक महत्व सिद्ध होता है, तो यह क्षेत्र पुरातात्विक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण पहचान हासिल कर सकता है।

https://youtu.be/mdek-qTG0TQ?si=esK4Yslp1BvT_Egk

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