MP News: नर्मदापुरम में अन्नदाता पर प्री-मानसून की मार, भीग रही मूंग की फसल, प्रशासन से की सर्वे कराने की मांग

Crops Damage Pre Monsoon: नर्मदापुरम में प्री-मानसून की बारिश से मूंग की फसल संकट में है। ग्राम रेहड़ा सहित कई क्षेत्रों में कटाई प्रभावित हुई है, जिसके चलते किसानों ने सर्वे की मांग उठाई है।
Narmadapuram Seoni Malwa Moong Crop Damage
प्री-मॉनसून से फसल बरमाद (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Narmadapuram Seoni Malwa Moong Crop Damage: बारिश और तेज हवाओं ने खेतों में तैयार खड़ी मूंग की फसल को संकट में डाल दिया है। नर्मदापुरम- प्री-मानसून की दस्तक ने सिवनीमालवा तहसील क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले एक सप्ताह से रुक-रुककर हो रही बारिश और तेज हवाओं ने खेतों में तैयार खड़ी मूंग की फसल को संकट में डाल दिया है।

बता दें कि कटाई के लिए पूरी तरह तैयार फसल बारिश के कारण खेतों में ही भीग रही है, जिससे उसकी गुणवत्ता प्रभावित होने और उत्पादन घटने की आशंका गहराने लगी है। किसान रोजाना मौसम साफ होने की उम्मीद में खेतों तक पहुंच रहे हैं, लेकिन बादलों की आंख-मिचौली उनकी मेहनत पर पानी फेर रही है। किसानों की नजरें अब साफ मौसम पर टिकी हुई हैं।

कुछ समय कटाई होने के बाद शुरू हो जाती है बारिश

ग्राम रेहड़ा के किसान सुनील पटेल ने बताया कि वे प्रतिदिन हार्वेस्टर लेकर खेतों में पहुंचते हैं लेकिन कुछ समय कटाई होने के बाद बारिश शुरू हो जाती है और काम रोकना पड़ता है। बार-बार रुक रही कटाई के कारण फसल खेतों में अधिक समय तक पड़ी हुई है, जिससे दाने खराब होने और उपज घटने का खतरा बढ़ गया है। किसानों का कहना है कि यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।

कच्चे रास्ते भी हैं किसानों के लिए बड़ी मुसीबत

नर्मदापुरम जिले के आस-पास के गांवो के किसानों का कहना है समस्या केवल बारिश तक सीमित नहीं है। खेतों तक पहुंचने वाले अधिकांश रास्ते अभी भी कच्चे हैं। हल्की बारिश में ही ये मार्ग कीचड़ में तब्दील हो जाते हैं, जिससे हार्वेस्टर और अन्य कृषि वाहन फंस जाते हैं। मशीनों को निकालने में अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है, जिससे खेती की लागत बढ़ रही है।

किसानों ने प्रशासन के सामने रखी यह मांग

बता दें कि, बारिश और तेज हवाओं को देखते हुए किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित फसलों का तत्काल सर्वे कराया जाए, नुकसान का आकलन कर राहत दी जाए और ग्रामीण संपर्क मार्गों को पक्का बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।

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