मुरैना में उफान पर क्वारी नदी, पानी में डूबे रपटे, जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहे ग्रामीण

Morena Rain News : मुरैना में क्वारी नदी का जलस्तर बढ़ने से कई रपटे डूब गए हैं। इसके बावजूद ग्रामीण तेज बहाव के बीच नदी पार कर रहे हैं, जबकि सुरक्षा इंतजाम नजर नहीं आ रहे।
Morena Kwari River Submerged Rapta
रपटे पर बहते पानी के बीच नदी पार करते ग्रामीण(फोटो सोर्स- नवभारत)
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Morena Kwari River Flood: मुरैना जिले में भले ही अच्छी बारिश का इंतजार अब भी बना हुआ है, लेकिन क्वारी नदी का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीण इलाकों में मुश्किलें बढ़ गई हैं। सबलगढ़ से लेकर जौरा और दिमनी विधानसभा क्षेत्र तक क्वारी नदी पर बने कई रपटे और पुलिया पानी में डूब गए हैं। इसके बावजूद ग्रामीण जान जोखिम में डालकर इन्हीं डूबे रपटों को पार कर रहे हैं। चिंता की बात यह है कि कई स्थानों पर अब तक प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नजर नहीं आ रहे हैं।

बागचीनी क्षेत्र में क्वारी नदी पर बना रपटा पानी में डूब गया है। सुबह से रपटे पर पानी आना शुरू हुआ और दोपहर तक तेज बहाव के साथ पानी ऊपर से बहने लगा। कुछ ही देर में रपटा करीब दो फीट पानी में डूब गया।

जान जोखिम में डाल रहे लोग

यह रपटा आसपास के कई गांवों के लोगों के आवागमन का प्रमुख रास्ता है। रास्ता डूबने के बावजूद ग्रामीणों की आवाजाही जारी रही। लोग पैदल ही नहीं, बल्कि दोपहिया और चार पहिया वाहनों से भी तेज बहाव के बीच रपटा पार करते नजर आए। कई बुजुर्ग और महिलाएं भी पानी के बीच से निकलने को मजबूर दिखे। दिमनी विधानसभा क्षेत्र में पलपुरा और विसंगपुर को जोड़ने वाले क्वारी नदी के रपटे पर भी करीब डेढ़ से दो फीट पानी बह रहा है। यहां भी ग्रामीण पानी के तेज बहाव के बीच पैदल और वाहनों से रपटा पार कर रहे हैं।

हादसा रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था जरूरी

इसी तरह रामपुर और सबलगढ़ क्षेत्र में भी क्वारी नदी के उफान के कारण करीब तीन रपटे और पुलिया पानी में डूब गई हैं। इसके बावजूद इन स्थानों पर न तो बैरिकेडिंग नजर आ रही है और न ही लोगों को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था की गई है। हर साल बारिश के दौरान क्वारी नदी के इन रपटों पर पानी आने के बाद हादसे का खतरा बढ़ जाता है।

बैरिकेडिंग की जरूरत

पहले प्रशासन की ओर से ऐसे स्थानों पर ग्राम पंचायत कर्मचारियों और पटवारियों की जिम्मेदारी तय की जाती थी, ताकि नदी में उफान के दौरान ग्रामीणों को रपटा पार करने से रोका जा सके। इस बार अब तक ऐसी व्यवस्था नजर नहीं आने से सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पानी का बहाव और बढ़ा तो स्थिति और खतरनाक हो सकती है। ऐसे में प्रशासन को तत्काल बैरिकेडिंग कर आवाजाही रोकनी चाहिए, ताकि किसी बड़े हादसे को टाला जा सके।

मुरैना में बारिश की भी कमी

दिलचस्प बात यह है कि मुरैना में इस साल अब तक अच्छी बारिश नहीं हुई है। 8 अगस्त तक जिले में सिर्फ 247.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि तक 734.1 मिलीमीटर बारिश हो चुकी थी। यानी पिछले साल की तुलना में इस बार 486.8 मिलीमीटर बारिश कम हुई है। जिले की औसत वार्षिक बारिश 706.9 मिलीमीटर है। पिछले 24 घंटे में जिले में सिर्फ 8.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। वर्षामापी केंद्रों के अनुसार पोरसा में 8, अंबाह में 4, मुरैना में 3.1 और कैलारस में 7 मिलीमीटर बारिश हुई।

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बारिश का आंकड़े

इस साल अब तक जौरा में सबसे ज्यादा 325 मिलीमीटर, कैलारस में 295, पोरसा में 284.5, मुरैना में 276, सबलगढ़ में 169 और अंबाह में सबसे कम 134.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार अगले सात दिनों में जिले में कहीं हल्की तो कहीं मध्यम बारिश हो सकती है। ऐसे में क्वारी नदी का जलस्तर और बढ़ने की स्थिति में प्रशासन के सामने रपटों पर सुरक्षा व्यवस्था की चुनौती और बढ़ सकती है।

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