इंदौर के सारांश जैन भारतीय टेस्ट टीम में शामिल, पिता की चिट्ठी बनी सफलता की सबसे बड़ी ताकत

Team India: इंदौर के युवा ऑलराउंडर सारांश जैन का पहली बार भारतीय टेस्ट टीम में चयन हुआ है। पिता की प्रेरणादायक चिट्ठी, वर्षों की मेहनत और परिवार के त्याग ने उनके इस सपने को साकार किया।
Saransh Jain from Indore celebrates after being selected for the Indian Test cricket team, with his family sharing the emotional journey behind his success.
क्रिकेटर सारांश जैन (फोटो सोर्स - नवभारत)
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Indore Cricketer Saransh Jain Selected for India Tests: इंदौर के लिए गर्व का क्षण है। शहर के प्रतिभाशाली ऑलराउंडर सारांश जैन का पहली बार भारतीय टेस्ट क्रिकेट टीम में चयन हुआ है। भारत को श्रीलंका दौरे पर 15 अगस्त से पहला और 23 अगस्त से दूसरा टेस्ट मैच खेलना है। भारत-ए टीम के साथ श्रीलंका दौरे पर शानदार प्रदर्शन के बाद चयनकर्ताओं ने उन्हें भारतीय टेस्ट टीम में जगह देकर उनकी मेहनत का सम्मान किया है। इस उपलब्धि के पीछे वर्षों का संघर्ष, परिवार का त्याग और पिता की प्रेरणा की भावुक कहानी छिपी है।

26 वर्षों तक पिता रहे पहले कोच

भारतीय टेस्ट टीम में चयन के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए सारांश जैन ने बताया कि उनके पिता सुबोध जैन पिछले 26 वर्षों से उनके पहले और सबसे बड़े कोच रहे हैं। रणजी क्रिकेट में मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर चुके सुबोध जैन ने बचपन से ही उन्हें क्रिकेट की बारीकियां सिखाईं। सारांश ने कहा कि गेंदबाजी में उन्होंने हरभजन सिंह और रविचंद्रन अश्विन से प्रेरणा ली, जबकि बल्लेबाजी में साईं सुदर्शन की तकनीक और संयम को अपना आदर्श माना।

कैंसर से जूझते पिता की चिट्ठी बनी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट

सारांश के पिता सुबोध जैन ने बताया कि वर्ष 2014 में उन्हें कैंसर होने का पता चला था। उस समय सारांश ऑस्ट्रेलिया दौरे पर थे और परिवार ने उनके खेल पर असर न पड़े, इसलिए यह बात उनसे छिपाई। जब वह लौटे, तब तक ऑपरेशन सफल हो चुका था। पिता की हालत देखकर सारांश टूट गए और क्रिकेट से दूरी बना ली। इसी दौरान बोलने में असमर्थ सुबोध जैन ने बेटे के लिए एक चिट्ठी लिखी, जिसमें लिखा था, "तुम जितना अच्छा क्रिकेट खेलोगे, मैं उतनी जल्दी ठीक हो जाऊंगा।" यही चिट्ठी सारांश के जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा बन गई।

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पूरे परिवार ने निभाई अहम भूमिका

सारांश के बड़े भाई सौरभ जैन ने बताया कि आर्थिक परिस्थितियों के कारण उन्हें अपना क्रिकेट करियर छोड़कर सिविल इंजीनियर बनना पड़ा, लेकिन उन्होंने हमेशा छोटे भाई को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। वहीं मां सरिता जैन ने कहा कि सारांश बचपन से ही मेहनती और लक्ष्य के प्रति समर्पित रहा है। उनका भारतीय टेस्ट टीम में चयन केवल परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे इंदौर और मध्य प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। अब सभी को उम्मीद है कि श्रीलंका दौरे पर सारांश अपने प्रदर्शन से भारतीय क्रिकेट में नई पहचान बनाएंगे।

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